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28 मई से नई दिल्‍ली में होगा चौथा भारत-अफ्रीका शिखर सम्‍मेलन

( विवेक ओझा ): कहते हैं पिछली सदी एशिया की थी और आने वाली सदी अफ्रीका की होगी। भारत से बेहतर इस बात को कौन जान सकता है। भारत ने अफ्रीका के देशों के सशक्तिकरण के लिए हर संभव प्रयास किया है और अब बदलती हुई वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के दौर में अफ्रीका से और गहरा जुड़ाव रखना जरूरी है। इसी बात को ध्यान में रखकर
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बताया है कि ऐसे समय में जब विश्‍व जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है उसमें भारत-अफ्रीका भागीदारी काफी महत्‍वपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि आज भारत की विदेश नीति में अफ्रीका का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है और भारत ने अफ्रीका में अपनी राजनयिक उपस्थिति का विस्‍तार किया है। विदेश मंत्री ने ये बात भारत-अफ्रीका शिखर सम्‍मेलन के लिए आज लोगो, विषय और वेबसाइट जारी करते हुए कही। यह सम्‍मेलन 28 से 31 मई तक नई दिल्‍ली आयोजित किया जाएगा।

सम्‍मेलन के बारे में जानकारी देते हुए नई दिल्‍ली में डॉ. जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका में 17 नए राजनयिक मिशन खोले गए हैं जिससे इनकी कुल संख्‍या बढ़कर 46 हो गई है। उन्‍होंने कहा कि यह अफ्रीका के हर क्षेत्र में संपर्क स्‍थापित करने की भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गौरतलब है कि अफ्रीकी संघ जो कि 55 अफ्रीकी देशों का महत्वपूर्ण मंच है , जी 20 का सदस्य बन चुका है और अब ब्रिक्स में साउथ अफ्रीका के अलावा अन्य अफ्रीकी देशों की भागीदारी की तैयारी शुरू हो चुकी है तो अफ्रीकी देशों के साथ संलग्नता बढ़ानी और जरूरी हो जाती है।

इसी क्रम में विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक शासन में भारत ने अफ्रीका के उपयुक्‍त स्‍थान का लगातार समर्थन किया है। उन्‍होंने कहा कि विकासशील और अल्‍पविकसित देशों की प्रमुखता से, आने वाले समय में वैश्विक शासन को आकार मिलना चाहिए। डॉ. जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका के साथ भारत का संबंध समानता, परस्‍पर सम्‍मान तथा साझा प्र‍गति के सिद्धांत के स्‍पष्‍ट दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्‍होंने कहा कि विकसित भारत 2047 और अफ्रीका का एजेंडा 2063 दोनों एक-दूसरे के पूरक प्रारूप हैं जो सतत वृद्धि और समावेशी विकास के जरिए समृद्धि और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने के संकल्‍प हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत-अफ्रीका के बीच संबंध सभ्‍यतागत जुड़ाव में निहित हैं, जो व्‍यापार, संस्‍कृति के आदान-प्रदान और जन संपर्क के जरिए आगे बढ़े हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत और अफ्रीका के बीच संबंध तब और मजबूत हुआ जब भारत ने उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ाई में अफ्रीकी देशों के साथ एकजुटता दिखाई। डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत के नेतृत्‍व में वैश्विक पहलो में अफ्रीकी देश प्रमुख भागीदार हैं। उन्‍होंने बताया कि भारत, अफ्रीका के सबसे बड़े व्‍यापारिक भागीदारों और द्विपक्षीय निवेशकों में से एक है।

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