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कानूनी शिक्षा में बड़ा सुधार: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिए देशव्यापी निरीक्षण के आदेश, वीकेंड और शिफ्ट-आधारित कक्षाओं पर लगाई रोक

सरिता त्रिपाठी/ दिल्ली भारत में कानूनी शिक्षा (legal education) की गुणवत्ता, पेशे की गरिमा और शैक्षणिक मानकों को बनाए रखने के लिए शीर्ष विधिक नियामक संस्था ने एक बेहद कड़ा और सुधारात्मक कदम उठाया है। दिल्ली से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, बार काउंसिल ने देश भर के सभी लॉ कॉलेजों (law colleges) के राष्ट्रव्यापी निरीक्षण (nationwide inspection) के आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। सोइबम रॉकी सिंह की रिपोर्ट बताती है कि यह निर्णय कानूनी पेशे में प्रवेश करने वाले छात्रों की योग्यता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) देश में कानूनी शिक्षा को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार है। विधिक शिक्षा के गिरते स्तर और कुछ संस्थानों द्वारा अपनाई जा रही ढीली कार्यप्रणाली को रोकने के लिए काउंसिल ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है। बार काउंसिल ने सप्ताहांत (weekend) और शिफ्ट-आधारित (shift-based) लॉ कक्षाओं के संचालन पर पूरी तरह से रोक (bars) लगा दी है।

इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून की पढ़ाई एक पूर्णकालिक (full-time) और गहन शैक्षणिक प्रक्रिया बनी रहे। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि वीकेंड या शिफ्ट-आधारित कक्षाएं अक्सर पाठ्यक्रम की गहराई, मूट कोर्ट (Moot Court) प्रैक्टिस और व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ समझौता करती हैं, जो एक कुशल अधिवक्ता तैयार करने के लिए नितांत आवश्यक है। राष्ट्रव्यापी निरीक्षण के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि बार काउंसिल अब बुनियादी ढांचे, फैकल्टी की उपलब्धता और छात्रों की न्यूनतम उपस्थिति के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने जा रही है।

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