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ब्रिटेन चुनाव: 4 जुलाई के महामुकाबले से पहले प्रचार चरम पर, भारतीय मूल के वोटरों को रिझाने के लिए सुनक और स्टार्मर ने झोंकी पूरी ताकत

विवेक ओझा/ लंदन/नई दिल्ली | ब्रिटेन के आगामी आम चुनावों (UK General Elections) में अब महज 8 दिन का समय बचा है। 4 जुलाई 2026 को होने वाले इस ऐतिहासिक मतदान से पहले राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। सत्ता बचाने की जद्दोजहद में लगे मौजूदा प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) और 14 साल बाद लेबर पार्टी की वापसी का सपना देख रहे कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने चुनाव प्रचार के इस आखिरी दौर में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जीत और हार का अंतर तय करने में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाने वाले भारतीय मूल के वोटरों (Indian Diaspora) को लुभाने के लिए दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने अपनी पूरी कूटनीतिक और राजनीतिक मशीनरी लगा दी है। इसी कड़ी में आज दोनों दलों ने ‘ब्रिटिश-इंडियन’ समुदाय को लक्षित करते हुए विशेष वादे और घोषणापत्र जारी किए हैं।

ऋषि सुनक का ‘देसी’ दांव: कंजर्वेटिव पार्टी का घोषणापत्र

भारतीय मूल के पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री होने के नाते ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी को इस समुदाय से काफी उम्मीदें हैं। अपनी सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को काटने के लिए सुनक ने ब्रिटिश-भारतीयों के लिए तीन बड़े वादे किए हैं:

  1. भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA): सत्ता में वापसी करने पर भारत के साथ लंबे समय से लटके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को पहले 100 दिनों के भीतर लागू करने की गारंटी।
  2.  हिंदू मंदिरों की सुरक्षा: लीसेस्टर (Leicester) जैसी घटनाओं को देखते हुए सुनक ने हिंदू मंदिरों और भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिए एक विशेष ‘सिक्योरिटी फंड’ और टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया है।
  3.  स्किल्ड वीजा में राहत: अवैध इमिग्रेशन पर सख्ती के बावजूद, भारतीय छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए लीगल और स्किल्ड वर्कर वीजा (Skilled Worker Visa) के नियमों को लचीला बनाए रखने का वादा किया गया है।

कीर स्टार्मर का ‘नया विजन’: लेबर पार्टी का पलटवार

लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर अच्छी तरह जानते हैं कि जेरेमी कॉर्बिन के दौर में कश्मीर जैसे मुद्दों पर पार्टी के रुख से भारतीय समुदाय नाराज हुआ था। उस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए स्टार्मर ने एक बिल्कुल नया विजन पेश किया है:

  • भारत के साथ ‘रणनीतिक साझेदारी’: स्टार्मर ने अपने घोषणापत्र में स्पष्ट किया है कि लेबर सरकार बनने पर नई दिल्ली के साथ कूटनीतिक, रक्षा और तकनीकी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।
  • नफरती अपराधों (Hate Crimes) पर जीरो टॉलरेंस: ब्रिटिश-भारतीयों को आश्वस्त किया गया है कि किसी भी प्रकार के नस्लीय या धार्मिक भेदभाव और ‘हिंदूफोबिया’ से सख्ती से निपटा जाएगा।
  • आर्थिक समानता और स्वास्थ्य: नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में सुधार, जिसमें हजारों भारतीय मूल के डॉक्टर और नर्स काम करते हैं, उसे लेबर पार्टी ने अपने प्रचार का मुख्य हथियार बनाया है।

आखिर क्यों इतने अहम हैं भारतीय वोटर?

ब्रिटेन में भारतीय मूल के लोगों की आबादी लगभग 18 लाख है, जो वहां के सबसे बड़े और सबसे समृद्ध अल्पसंख्यक समूहों में से एक है। चुनावी गणित के हिसाब से ब्रिटेन की करीब 40 से 50 स्विंग सीटों (Swing Constituencies) पर भारतीय वोटर सीधे तौर पर हार-जीत तय करने का माद्दा रखते हैं।

ऐतिहासिक रूप से भारतीय समुदाय लेबर पार्टी का समर्थक रहा है, लेकिन पिछले एक दशक में संपन्न कारोबारी और पेशेवर वर्ग ने कंजर्वेटिव पार्टी की तरफ भी अपना झुकाव दिखाया है।

‘किंगमेकर’ बने भारतीय

  •  4 जुलाई का यह चुनाव सिर्फ ब्रिटेन का घरेलू मामला नहीं है, बल्कि भारत-यूके संबंधों की भविष्य की दिशा भी तय करेगा।
    ऋषि सुनक का भारतीय मूल का होना उनके लिए एक भावनात्मक कार्ड जरूर है, लेकिन ब्रिटेन का आम वोटर इस वक्त महंगाई, चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं (NHS) और अर्थव्यवस्था से परेशान है। दूसरी ओर, कीर स्टार्मर ने जेरेमी कॉर्बिन युग की ‘एंटी-इंडिया’ छवि को बड़ी चतुराई से धोकर खुद को भारत के एक भरोसेमंद दोस्त के रूप में पेश किया है। दोनों नेताओं का भारतीय प्रवासियों के लिए अलग से घोषणापत्र निकालना यह साबित करता है कि आज ब्रिटेन की राजनीति में भारतीय समुदाय का रसूख कितना बढ़ चुका है।
  • यदि 5 जुलाई को लेबर पार्टी सत्ता में आती है, तो नई दिल्ली को एक नए सिरे से कूटनीतिक शुरुआत करनी होगी, लेकिन स्टार्मर का बदला हुआ रुख भारत के लिए एक बहुत बड़ा कूटनीतिक प्लस पॉइंट (Diplomatic Plus Point) है।

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