बंधे थे हाथ-पैर, पूरे जिस्म पर ब्लेड के कट…दरिंदों ने प्राइवेट पार्ट में डाली लकड़ी और कारतूस; बेगूसराय में निर्भया जैसी हैवानियत

बेगूसराय : बिहार के बेगूसराय जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठे। यहां एक महिला के साथ न सिर्फ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया गया, बल्कि हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए उसके पूरे शरीर को ब्लेड से गोद दिया गया। इस मामले में पुलिस की घोर लापरवाही उजागर होने के बाद डीआईजी शैलेश कुमार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चकिया थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया है और आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया है।
आधी रात को पति को कमरे में बंद कर बरामदे में खींचा
यह रूह कंपा देने वाली वारदात बीती 11 जून की रात करीब 12 बजे की है। पीड़िता के ममेरे भाई और परिजनों के मुताबिक, रामू महतो, सूरज कुमार और नीतीश कुमार नाम के दबंगों ने दो अज्ञात बदमाशों के साथ मिलकर घर पर धावा बोला। आरोपियों ने सबसे पहले पीड़िता के पति के कमरे का दरवाजा बाहर से लॉक कर दिया। इसके बाद शौचालय के पास काम कर रही महिला को जबरन घसीटकर बरामदे में ले आए और पांचों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
गुप्तांग में कारतूस और पत्थर… देवरानी ने बयां की उस खौफनाक रात की दास्तां
पीड़िता की देवरानी ने उस काली रात का मंजर बयां करते हुए बताया, “रात को अचानक जेठ के कमरा पीटने और चिल्लाने की आवाज आई। मैंने जाकर दरवाजा खोला, तो जेठ बदहवास हालत में दीदी को ढूंढने लगे। जब हम सब भागकर बाथरूम की तरफ गए, तो वहां दीदी नग्न और बेसुध हालत में पड़ी थीं। उनके हाथ पीछे करके रस्सी से बंधे थे और मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। सबसे ज्यादा खौफनाक यह था कि उनके पूरे जिस्म पर ब्लेड से काटने के गहरे जख्म थे।” अस्पताल में मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टरों ने पुष्टि की कि दरिंदों ने अमानवीयता दिखाते हुए पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में कारतूस, पत्थर और लकड़ी के टुकड़े तक ठूंस दिए थे।
पीड़ित परिवार को थाने से दुत्कार कर भगाया, लापरवाही पर थाना प्रभारी नपे
देवरानी का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद जब वे लहूलुहान और बेहोश जेठानी को लेकर चकिया थाने पहुंचे, तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों का दिल नहीं पसीजा। पुलिस ने सहानुभूति दिखाने के बजाय पीड़ित परिवार के साथ गाली-गलौज की, उन्हें डांट-फटकार कर भगा दिया और कहा कि पहले जाकर इलाज कराओ। 13 जून को जैसे-तैसे एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। मामला मीडिया में आने और चौतरफा फजीहत होने के बाद डीआईजी खुद सदर अस्पताल पहुंचे, पीड़िता का हाल जाना और चकिया थानाध्यक्ष राजीव रंजन को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
मार्च में भी किया था निर्वस्त्र कर रेप का प्रयास, पुलिस की शह पर बढ़े हौसले
पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि इसी साल मार्च के महीने में भी इन्हीं बदमाशों ने घर में घुसकर महिला को निर्वस्त्र कर पीटा था और बलात्कार का प्रयास किया था। उस वक्त भी चकिया थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने मोटी रकम लेकर आरोपियों को थाने से ही जमानत दे दी और कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस की इसी ढिलाई के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए और उन्होंने इस भयावह वारदात को अंजाम दे डाला। मुख्य आरोपी रामू महतो कुख्यात अपराधी है, जिस पर रेलवे और स्थानीय थाने में कई संगीन मामले दर्ज हैं।



