गोरखपुर AIIMS का ऐतिहासिक विस्तार
PM मोदी वर्चुअली करेंगे 250 बेड वाले 'एडवांस ट्रॉमा सेंटर' का उद्घाटन, पूर्वांचल को मिलेगी नई संजीवनी

गोरखपुर (राघवेंद्र प्रताप सिंह): पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल), जो कभी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों और लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिए जाना जाता था, आज देश के चिकित्सा क्षेत्र में एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) अब एक और बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। आगामी सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से वर्चुअली जुड़कर गोरखपुर एम्स में नवनिर्मित 250 बेड वाले ‘एडवांस ट्रॉमा सेंटर और क्रिटिकल केयर ब्लॉक’ (Advanced Trauma Centre and Critical Care Block) का ऐतिहासिक उद्घाटन करेंगे। यह नया विस्तार न केवल गोरखपुर बल्कि पूरे पूर्वांचल, सटे हुए बिहार और नेपाल के लाखों मरीजों के लिए एक ‘जीवनदायिनी’ साबित होने जा रहा है।
क्या है ‘एडवांस ट्रॉमा सेंटर’ और क्यों थी इसकी सख्त जरूरत?
किसी भी बड़े अस्पताल में ‘ट्रॉमा सेंटर’ वह सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जहां सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर चोटों, जलने या किसी भी प्रकार की जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी के मरीजों का इलाज किया जाता है। अब तक पूर्वांचल में ऐसी किसी भी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में मरीजों को सीधे लखनऊ के केजीएमयू (KGMU) या दिल्ली के एम्स रेफर कर दिया जाता था। इस लंबी दूरी को तय करने में ‘गोल्डन आवर’ (शुरुआती और सबसे अहम एक घंटा) बीत जाता था, जिससे कई मरीजों की रास्ते में ही मौत हो जाती थी।
250 बिस्तरों वाले इस अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर और क्रिटिकल केयर ब्लॉक के शुरू होने से यह सबसे बड़ी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। इस नए ब्लॉक में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (OT), उन्नत जीवन रक्षक प्रणालियों (Advanced Life Support Systems) से लैस आईसीयू (ICU) बेड्स, चौबीसों घंटे काम करने वाली सिटी स्कैन व एमआरआई मशीनें और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की एक पूरी फौज तैनात रहेगी। अब सड़क दुर्घटनाओं या गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के मरीजों को चंद मिनटों के भीतर विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।
पूर्वांचल के चिकित्सा ढांचे में ‘मील का पत्थर’
यह उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के ‘हेल्थकेयर विजन’ का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। एम्स गोरखपुर पहले ही ओपीडी (OPD) और सामान्य सर्जरी के मामले में प्रतिदिन हजारों मरीजों का भार उठा रहा है। इस एडवांस ट्रॉमा सेंटर के जुड़ने से एम्स गोरखपुर की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इसका सीधा फायदा गोरखपुर के अलावा बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर और यहां तक कि पश्चिमी बिहार के सीमावर्ती जिलों की एक विशाल आबादी को मिलेगा।
‘रेफरल संस्कृति’ का होगा अंत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह वर्चुअल उद्घाटन केवल एक इमारत का लोकार्पण नहीं है, बल्कि यह पूर्वांचल से उस पुरानी ‘रेफरल संस्कृति’ (Referral Culture) के अंत की घोषणा है, जिसने दशकों तक यहां के मरीजों को परेशान किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह 250 बेड का ब्लॉक राज्य के मेडिकल टूरिज्म और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित होगा। उत्तर प्रदेश सरकार और एम्स प्रशासन ने इस महा-उद्घाटन के लिए अपनी सभी प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं।



