ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी
अमृतसर में हाई अलर्ट, स्वर्ण मंदिर के आसपास सुरक्षा का कड़ा पहरा

अमृतसर (पल्लवी श्रीवास्तव): भारतीय इतिहास के सबसे संवेदनशील और दर्दनाक पन्नों में से एक ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ की बरसी पर आज पूरा पंजाब, विशेषकर अमृतसर शहर, हाई अलर्ट पर है। 6 जून के इस ऐतिहासिक दिन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किए हैं। सिखों के सर्वोच्च धार्मिक स्थल, स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) और उसके आसपास के पूरे इलाके को एक तरह से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती यह स्पष्ट करती है कि प्रशासन किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या तनाव को रोकने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।
इतिहास के घाव और वर्तमान की सतर्कता
जून 1984 में स्वर्ण मंदिर परिसर से चरमपंथियों को बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना द्वारा की गई इस सैन्य कार्रवाई के गहरे घाव आज भी सिख समुदाय के दिलों में मौजूद हैं। हर साल इस दिन सिख जत्थेबंदियों और कट्टरपंथी संगठनों द्वारा विशेष अरदास और मार्च का आयोजन किया जाता है। कई बार इस दौरान ‘खालिस्तान’ के समर्थन में नारेबाजी और उग्र प्रदर्शन की स्थितियां भी बन जाती हैं, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। एक पत्रकार के रूप में जब हम इस स्थिति का विश्लेषण करते हैं, तो समझ आता है कि प्रशासन के लिए यह दिन एक दोधारी तलवार की तरह होता है—एक तरफ धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना होता है, तो दूसरी तरफ राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर नकेल भी कसनी होती है।
जमीन से लेकर आसमान तक निगरानी
पंजाब पुलिस ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। अमृतसर शहर में प्रवेश करने वाले सभी मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और हर आने-जाने वाले वाहन की सघन चेकिंग की जा रही है। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पंजाब पुलिस के कमांडो लगातार संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च कर रहे हैं। इसके साथ ही, असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए आसमान से भी निगरानी की जा रही है। सोशल मीडिया पर भी साइबर सेल की पैनी नजर है ताकि कोई भी भड़काऊ पोस्ट या अफवाह माहौल न बिगाड़ सके।
शांति की अपील और आगे का रास्ता
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने भी सिख संगत से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी अकीदत पेश करने और अरदास में शामिल होने की अपील की है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध या दुख जताना सबका अधिकार है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि इस भावना की आड़ में कुछ मुट्ठी भर लोग राज्य की शांति और भाईचारे को नुकसान न पहुंचाएं। अमृतसर की ये चाक-चौबंद सुरक्षा इसी संतुलन को बनाए रखने का एक गंभीर प्रयास है।


