विराट कोहली ने खोले मुश्किल दौर के राज, द्रविड़-राठौर को दिया श्रेय
भारतीय क्रिकेट के मॉडर्न डे ग्रेट विराट कोहली ने जब टेस्ट कप्तानी छोड़ी थी, तब पूरा क्रिकेट जगत हैरान रह गया था। आज भी वह भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान हैं। आखिर उन्होंने कप्तानी छोड़ने का फैसला क्यों लिया? वह राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौर के इतने अहसानमंद क्यों हैं? इन तमाम सवालों पर किंग कोहली ने खुलकर और दिल से बात की।
उन्होंने कहा कि कप्तानी और बल्लेबाजी, दोनों में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते-करते वह पूरी तरह थक चुके थे। उन्हें ऐसा महसूस होने लगा था मानो उन्होंने खुद को पूरी तरह खपा दिया हो और अब उनके भीतर देने के लिए कुछ भी बाकी न बचा हो।
कोहली ने उस लगातार बने रहने वाले दबाव का भी जिक्र किया, जिसमें कप्तान हर समय सवालों के घेरे में रहता है। टीम जीत जाए तो व्यक्तिगत प्रदर्शन पर सवाल उठते हैं और अगर व्यक्तिगत प्रदर्शन अच्छा हो लेकिन टीम हार जाए, तो नतीजों को लेकर आलोचना होती है।

मंगलवार को आरसीबी इनोवेशन लैब इंडियन स्पोर्ट्स समिट में बोलते हुए विराट कोहली ने कहा कि बल्लेबाजी और कप्तानी दोनों में सर्वश्रेष्ठ देने का दबाव धीरे-धीरे उनकी सारी ऊर्जा खींचता चला गया।
उन्होंने कहा, “उम्मीदों को संभालना बेहद मुश्किल था। अगर टीम जीतती थी और मैं रन नहीं बना पाता था, तो मेरे प्रदर्शन पर सवाल उठते थे। वहीं, अगर मैं अच्छा खेलता था लेकिन टीम नहीं जीतती थी, तो नतीजों को लेकर सवाल किए जाते थे। मैं हमेशा इन दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा और अपनी तरफ से हर संभव योगदान देना चाहता था।”
कोहली ने आगे कहा, “मैं उस मुकाम पर पहुंच गया था जहां मैं बल्लेबाजी यूनिट का केंद्र बन चुका था। इसके बाद मैं नेतृत्व का भी केंद्र बिंदु बन गया। सच कहूं तो मुझे बिल्कुल एहसास नहीं हुआ कि इन दोनों जिम्मेदारियों का मेरी रोजमर्रा की जिंदगी पर कितना बड़ा असर पड़ रहा है।
मैं भारतीय क्रिकेट को शीर्ष पर बनाए रखने के लिए इतना ज्यादा प्रेरित था कि मैंने कभी खुद पर पड़ रहे दबाव की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। लेकिन जब मैंने कप्तानी छोड़ी, तब तक मैं पूरी तरह टूट चुका था। ऐसा लग रहा था मानो मेरे भीतर अब कुछ भी बाकी नहीं बचा हो। वह दौर बेहद कठिन था।”
विराट कोहली ने यह भी बताया कि 2021 से 2022 के बीच टेस्ट क्रिकेट में उनके कठिन दौर के समय तत्कालीन मुख्य कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर ने उनका भरपूर साथ दिया। 2016 से 2019 तक टेस्ट क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले कोहली का खराब दौर 2021 में शुरू हुआ, जब उन्होंने सिर्फ 28.21 की औसत से रन बनाए।
2022 में भी उनका टेस्ट औसत 26.5 रहा। हालांकि, 2023 में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 8 टेस्ट मैचों में 55.91 की औसत से 671 रन बनाए। कोहली ने कहा, “राहुल भाई और विक्रम राठौर… मैं यह बात कई बार कह चुका हूं। जब भी मैं उनसे मिलता हूं या उन्हें देखता हूं, तो दिल की गहराइयों से उनका धन्यवाद करता हूं।”



