नार्को-टेररिज्म के खिलाफ भारत का महा-प्रहार
एनसीबी के 'ऑपरेशन रेजपिल' में 227 किलो 'कैप्टागन' जब्त, अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़

: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को नशीले पदार्थों के जहर से बचाना भी इसका एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। हाल ही में, भारत की शीर्ष मादक पदार्थ विरोधी एजेंसी, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (NCB – Narcotics Control Bureau), ने एक ऐसा दुस्साहसिक और सफल ऑपरेशन अंजाम दिया है जिसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनी जा रही है। एनसीबी ने अपने अत्यंत गुप्त और सुव्यवस्थित मिशन ‘ऑपरेशन रेजपिल’ (Operation RAGEPILL) के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए भारी मात्रा में—लगभग 227 किलोग्राम—’कैप्टागन’ (Captagon) मादक पदार्थ जब्त किया है। यह जब्ती न केवल मात्रा के दृष्टिकोण से विशाल है, बल्कि यह नार्को-टेररिज्म (नशीले पदार्थों और आतंकवाद के गठजोड़) के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की एक बड़ी विजय है।
क्या है ‘कैप्टागन’ (Captagon) और क्यों है यह इतना खतरनाक?
इस जब्ती की गंभीरता को ‘कैप्टागन’ नामक ड्रग्स की प्रकृति से समझा जा सकता है। कैप्टागन को दुनिया भर में “जिहादियों का ड्रग” (Jihadists’ Drug) या “आईएसआईएस (ISIS) पिल” के नाम से कुख्याति प्राप्त है। यह एम्फ़ैटेमिन (Amphetamine) प्रकार का एक सिंथेटिक उत्तेजक (Stimulant) है। इसका मुख्य उत्पादन सीरिया, लेबनान और मध्य पूर्व के अन्य संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में होता है।
इस ड्रग्स का सेवन करने से व्यक्ति की नींद, भूख और थकान गायब हो जाती है और उसमें एक कृत्रिम, हिंसक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि आतंकी संगठन अपने लड़ाकों को युद्ध के मैदान में अमानवीय कृत्य करने के लिए इस ड्रग्स का सेवन कराते हैं। पश्चिमी एशिया में यह ड्रग्स आतंक के वित्तपोषण (Terror Funding) का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है।
‘ऑपरेशन रेजपिल’ की सफलता और खुफिया ग्रिड:
भारत में इतनी बड़ी मात्रा में कैप्टागन का पकड़ा जाना एक चिंताजनक संकेत था कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स माफिया भारत को एक नए बाजार या पारगमन मार्ग (Transit Route) के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे थे। ‘ऑपरेशन रेजपिल’ रातों-रात की गई कार्रवाई नहीं थी। एनसीबी की खुफिया टीम महीनों से डार्क वेब (Dark Web), डमी कंपनियों, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय कूरियर मार्गों पर कड़ी निगरानी रख रही थी। विदेशी खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर एनसीबी ने इस नेटवर्क के ‘हैंडलर्स’ की पहचान की और बिल्कुल सटीक समय पर इस खेप को इंटरसेप्ट (Intercept) किया। जब्त किए गए ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये में आंकी गई है।
भारत के लिए खतरे की घंटी और आगे की रणनीति:
पारंपरिक रूप से भारत अफीम, हेरोइन और कोकीन की तस्करी का सामना करता रहा है, लेकिन ‘कैप्टागन’ जैसे सिंथेटिक और आतंकी पृष्ठभूमि वाले ड्रग्स का भारत पहुंचना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक नया और गंभीर खतरा है। यदि यह ड्रग्स भारतीय युवाओं या सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच जाता, तो इसके सामाजिक और सुरक्षा संबंधी परिणाम विनाशकारी हो सकते थे। इस गिरोह के पर्दाफाश होने से यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकी संगठन ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाले काले धन का उपयोग भारत में स्लीपर सेल को सक्रिय करने या हथियार खरीदने के लिए कर सकते थे।
एनसीबी का ‘ऑपरेशन रेजपिल’ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता, पेशेवर दक्षता और तकनीकी सर्वोच्चता का एक शानदार उदाहरण है। 227 किलो कैप्टागन की जब्ती ने उस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ दी है जो भारत को नार्को-टेररिज्म का अड्डा बनाना चाहता था। हालांकि, यह लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होती। सरकार को समुद्री सीमाओं, हवाई अड्डों और अंतरराष्ट्रीय कूरियर सेवाओं पर जांच तंत्र को और अधिक मजबूत करना होगा। देश के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए मादक पदार्थों के खिलाफ इस युद्ध में हर नागरिक का सहयोग भी अत्यंत अनिवार्य है।



