राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौड़ ने मुश्किल दौर से उबरने में की मदद : विराट कोहली

नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने खुलासा किया है कि कप्तानी छोड़ने के बाद अपने कठिन दौर में पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़ ने उन्हें मानसिक रूप से काफी सहारा दिया। कोहली ने कहा कि दोनों ने उनका इस तरह ख्याल रखा कि उनके भीतर फिर से क्रिकेट का आनंद लेने की भावना लौट आई।
मंगलवार को बेंगलुरु में आयोजित आरसीबी इनोवेशन लैब इंडियन स्पोर्ट्स समिट के दौरान कोहली ने कहा कि टेस्ट कप्तानी छोड़ने के बाद का समय उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। 2020 से 2022 के बीच वह टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक शतक नहीं लगा सके थे।
कोहली ने कहा, “मैं कई बार यह बात कह चुका हूं कि राहुल भाई और विक्रम राठौड़ ने मेरे लिए जो किया, उसके लिए मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा। उन्होंने मेरा इस तरह ख्याल रखा कि मेरे भीतर उनके लिए खेलने, मेहनत करने और खुद को बेहतर साबित करने की इच्छा पैदा हुई।”
उन्होंने कहा कि दोनों कोच लगातार उन्हें उनकी उपलब्धियों की याद दिलाते रहे, क्योंकि खिलाड़ी अक्सर अपने सफर और उपलब्धियों पर ध्यान नहीं दे पाते।
कोहली ने बताया कि एक खिलाड़ी के भीतर हमेशा असुरक्षा की भावना बनी रहती है। उन्होंने कहा, “आज भी जब मैं नेट्स में जाता हूं तो सोचता हूं कि युवा खिलाड़ी मुझे देख रहे हैं। अगर मेरा सत्र खराब रहा तो वे सोच सकते हैं कि क्या यही खिलाड़ी 20 साल से क्रिकेट खेल रहा है। यह भावना हमेशा रहती है।”
पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि राहुल द्रविड़ खुद इस दौर से गुजर चुके थे, इसलिए वह उनकी मानसिक स्थिति को अच्छी तरह समझते थे।
कोहली ने कहा, “राहुल भाई ने शीर्ष स्तर पर यह सब महसूस किया था। विक्रम भी लंबे समय से टीम के साथ थे। दोनों समझते थे कि मैं क्या महसूस कर रहा हूं और उन्होंने मानसिक रूप से मेरा पूरा ध्यान रखा। इसी वजह से मैं फिर से क्रिकेट का आनंद उठा सका।”
कोहली ने कप्तानी के अनुभव को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि नेतृत्व केवल रणनीति नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को समझने और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने की जिम्मेदारी भी होती है।
उन्होंने कहा, “कप्तानी करते समय आप खुद के बारे में सोचना छोड़ देते हैं। आप पूरी तरह टीम पर केंद्रित हो जाते हैं। उस दौरान यह भी ख्याल नहीं आता कि कोई आपसे पूछे कि आप कैसे हैं।”
कोहली ने स्वीकार किया कि कप्तानी के आखिरी दौर में उन्हें एहसास हुआ कि लगातार जिम्मेदारियों ने उन्हें मानसिक रूप से काफी थका दिया था।
उन्होंने कहा, “करीब नौ साल तक किसी ने मुझसे यह नहीं पूछा कि मैं कैसा हूं। हालांकि मैंने इसे कभी शिकायत की तरह नहीं देखा। अगर मुझे फिर मौका मिले तो मैं नेतृत्व को उसी तरह निभाना चाहूंगा।”
वर्कलोड मैनेजमेंट पर बोलते हुए कोहली ने कहा कि खिलाड़ियों को पहले अपनी क्षमता की सीमा समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी बहुत जल्दी अपने वर्कलोड को नियंत्रित करने लगे तो वह शायद अपनी पूरी क्षमता तक कभी नहीं पहुंच पाएगा।



