पीडब्ल्यूएल सितारों ने सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में बिखेरा जलवा, भारत में कुश्ती के विकास में लीग की भूमिका फिर हुई मजबूत साबित
नई दिल्ली/गोंडा : प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) का प्रभाव घरेलू सर्किट पर भी लगातार देखने को मिल रहा है। हाल ही में 10 से 12 मई 2026 के बीच गोंडा में आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट में लीग के ऐतिहासिक पांचवें सीजन में हिस्सा लेने वाले कई पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन कर अपनी छाप छोड़ी।
इस प्रतियोगिता के पदक विजेताओं को आगामी विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के चयन ट्रायल्स के लिए पात्रता मिली है। ऐसे में पीडब्ल्यूएल पहलवानों के प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित किया कि लीग भारत के हाई-परफॉर्मेंस रेसलिंग इकोसिस्टम में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पीडब्ल्यूएल सीजन 5 के कई खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर जगह बनाई और यह दिखाया कि लीग द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ लगातार मिलने वाला अनुभव और प्रतिस्पर्धा भारतीय पहलवानों को किस तरह मजबूत बना रही है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाने के बाद अब घरेलू सर्किट में भी इन पहलवानों की सफलता ने लीग द्वारा तैयार की गई प्रतिभा की गहराई को उजागर किया है।

पुरुष फ्रीस्टाइल वर्ग में यूपी डॉमिनेटर्स के सागर ने 57 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि महाराष्ट्र केसरी के पहलवान यश तुषीर ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 74 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
तुषीर की जीत खास तौर पर एक प्रेरणादायक वापसी की कहानी रही। पूर्व वर्ल्ड जूनियर कांस्य पदक विजेता यश तुषीर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला दो साल पहले एशियन चैंपियनशिप में हुआ था। इसके बाद उन्हंम घुटने, कंधे और पैर की उंगली की गंभीर चोटों से जूझना पड़ा और उन्होंने छह महीने तक पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरने के बाद वापसी की। गोंडा में उन्होंने पांच मुकाबले जीतते हुए दमदार अंदाज में स्वर्ण पदक हासिल किया और आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिए अपनी दावेदारी मजबूत की।
टाइगर्स ऑफ मुंबई दंगल्स के पहलवान नवीन ने 79 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारतीय कुश्ती के स्टार दीपक पूनिया, जिन्होंने पीडब्ल्यूएल सीजन 5 में महाराष्ट्र केसरी का प्रतिनिधित्व किया था, ने 92 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपने शानदार करियर में एक और उपलब्धि जोड़ी।
महिला वर्ग में दिल्ली दंगल वॉरियर्स की पहलवान अंजलि ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 62 किग्रा वर्ग में रजत पदक हासिल किया और आगामी राष्ट्रीय टीम चयन प्रक्रिया के लिए अपनी संभावनाओं को मजबूत किया।
इन प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह दिखाया कि पीडब्ल्यूएल भारतीय पहलवानों को उच्च दबाव की परिस्थितियों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए कितना महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है। ओलंपियन, अंतरराष्ट्रीय सितारों, स्थापित भारतीय पहलवानों और उभरती प्रतिभाओं को एक प्रतिस्पर्धी संरचना में साथ लाकर यह लीग देश में कुश्ती के विकास में बड़ी भूमिका निभा रही है, ऐसा पीडब्ल्यूएल के सीईओ और प्रमोटर श्री अखिल गुप्ता ने कहा।
इस वर्ष की शुरुआत में पीडब्ल्यूएल की सफल वापसी का सकारात्मक असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिला था, जहां सीजन 5 में हिस्सा लेने वाले कई भारतीय और विदेशी पहलवानों ने बाद की प्रमुख वैश्विक प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया।
जनवरी में नोएडा इंडोर स्टेडियम में आयोजित पीडब्ल्यूएल सीजन 5 ने एक बार फिर खुद को भारत की प्रमुख ओलंपिक शैली की कुश्ती लीग के रूप में स्थापित किया। इसमें छह फ्रेंचाइजी — टाइगर्स ऑफ मुंबई दंगल, हरियाणा थंडर्स, महाराष्ट्र केसरी, यूपी डॉमिनेटर्स, पंजाब रॉयल्स और दिल्ली दंगल वॉरियर्स — ने हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष पहलवानों ने विश्वस्तरीय माहौल में मुकाबला किया, जहां हरियाणा थंडर्स ने खिताब अपने नाम किया।
भारत की सबसे बड़ी ओलंपिक शैली की कुश्ती लीग प्रो रेसलिंग लीग राष्ट्रीय कुश्ती संस्थाओं के सहयोग से देश के कुश्ती इकोसिस्टम को मजबूत करने में लगातार अहम भूमिका निभा रही है। लीग के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत द्वारा जीते गए 17 पदकों में से 11 पदक पीडब्ल्यूएल पहलवानों ने हासिल किए, जो यह दर्शाता है कि यह लीग भारतीय पहलवानों को महाद्वीपीय और वैश्विक स्तर पर सफलता दिलाने का मजबूत मंच बन चुकी है।



