दिनेश त्रिवेदी बने बांग्लादेश में भारत के नए हाई कमिश्नर

पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को इसकी घोषणा की। एमईए ने एक बयान जारी कर उनकी नियुक्ति की पुष्टि की। लिखा, “दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला हाई कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वह जल्द ही यह पद संभालेंगे।” पूर्व केंद्रीय मंत्री के उच्चायुक्त बनने के संकेत पहले ही मिलने लगे थे। 19 अप्रैल को ही भाजपा नेता और पार्टी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पोस्ट के जरिए “पूर्व केंद्रीय मंत्री और बैरकपुर से सांसद रहे दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किए जाने पर बधाई” दी थी।
दिनेश त्रिवेदी काफी अनुभवी राजनेता रहे हैं। उनकी नियुक्ति की टाइमिंग कई मायनों में खास है। ये ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश आपसी संबंधों को फिर से सहज करने की कोशिश कर रहे हैं। त्रिवेदी रेल मंत्री (2011) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 2012 में रेल बजट में यात्री किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। इस फैसले का ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध किया और आखिरकार त्रिवेदी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में टीएमसी के कोटे से मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाया गया था।
दिनेश त्रिवेदी ने 12 फरवरी 2021 को टीएमसी से इस्तीफा दिया और अगले महीने 6 मार्च 2021 को बीजेपी का दामन थाम लिया था। त्रिवेदी पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से 2009 से 2019 तक सांसद रहे। इसके अलावा, वे 1990-96 और 2002-08 के दौरान राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। 75 वर्षीय त्रिवेदी करियर डिप्लोमैट प्रणय वर्मा की जगह लेंगे। मंझे हुए राजनेता त्रिवेदी भारत-बांग्लादेश संबंधों को सुधारने में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
दोनों देशों के संबंध तब खराब हुए थे, जब बांग्लादेश में चले आंदोलन के बाद तख्तापलट हुआ और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था। यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तल्खी स्पष्ट तौर पर दिखी थी। हाल ही में बांग्लादेश में संसदीय चुनाव हुए जिसमें बीएनपी के तारिक रहमान प्रधानमंत्री चुने गए। उनके आने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार के संकेत साफ दिखे हैं।
8 अप्रैल को, विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर ने नई दिल्ली में रहमान और उनके प्रतिनिधिमंडल संग बैठक की, जिसमें आपसी संबंधों, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा की थी।बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पोस्ट में लिखा, “हमने अपने आपसी संबंधों को इसके अलग-अलग पहलुओं में मजबूत करने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय और ग्लोबल डेवलपमेंट पर विचारों का आदान-प्रदान किया। एक दूसरे के संपर्क में रहने पर जोर दिया।”
खलीलुर रहमान का भारत दौरा इसलिए अहम था क्योंकि फरवरी में बीएनपी सरकार बनने के बाद किसी बांग्लादेशी मंत्री का यह पहला भारत दौरा था। इससे भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में बदलाव का संकेत मिलने लगा था। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल के दौरान हिंदुओं पर बढ़ते हमलों और भारत विरोधी बयानबाजी के कारण रिश्तों में तनाव आ गया था।



