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भारत के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजनाओं की हुई समीक्षा 

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा की है , जिसके तहत पहले चरण में सात ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी ताकि छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा सके।

इस पहल का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल युवाओं की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है, जिसने गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए इस क्षेत्र को खोलने के बाद पिछले पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया है।

यह समीक्षा इन-स्‍पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के बाद हुई, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष सुधारों में हुई प्रगति और मूल्य श्रृंखला में निजी खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी का अवलोकन प्रस्तुत किया।

भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, और स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में एकल अंक से बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप्स अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह और पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं। बढ़ती वैश्विक रुचि स्थापित अंतरिक्ष यात्री देशों सहित अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के साथ बढ़ते जुड़ाव में भी परिलक्षित होती है।

इस गति को बनाए रखने के लिए कई लक्षित पहलें शुरू की गई हैं। विकास के चरण में स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए एसआईडीबीआई के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया जा रहा है, वहीं 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरुआती चरण के नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों में परिवर्तित करने में मदद कर रहा है। सीड फंड योजना के तहत विचार और प्रोटोटाइप चरण में स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान, मार्गदर्शन और इकोसिस्टम सहायता प्रदान की जा रही है।

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