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लखनऊ नगर निगम के विशेष सदन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा

निंदा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित

लखनऊ: नगर निगम लखनऊ में गुरुवार को आयोजित विशेष सदन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। नगर निगम मुख्यालय स्थित त्रिलोकनाथ हॉल में सुबह 11 बजे शुरू हुई इस बैठक में पार्षदों, अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति रही। सदन के दौरान हालिया घटनाक्रम और महिला सम्मान से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।

सदन को संबोधित करते हुए महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल ने भावुक शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह केवल महापौर के रूप में नहीं, बल्कि एक सैनिक परिवार से जुड़ी महिला के रूप में भी यहाँ खड़ी हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अनुशासन और स्वाभिमान उनके जीवन के मूल मूल्य हैं, लेकिन बुधवार सुबह उनके आवास पर हुई घटना ने लोकतंत्र और मानवता दोनों को शर्मसार किया है।

सदन में कई पार्षदों ने भी अपने विचार रखे। पार्षद श्रीमती रेखा सिंह, नेहा सिंह, शिवम उपाध्याय, गौरी सांवरिया, ऋचा मिश्रा, भृगुनाथ शुक्ला एवं अनुराग मिश्रा (अन्नू) ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में बोलते हुए महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार और सामाजिक सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

महापौर ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिस देश में नदियों को ‘माँ’ कहा जाता है, वहाँ नारी के सम्मान को ठेस पहुंचाना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि माँ, बहन और बेटी जैसे पवित्र रिश्तों का अपमान देश की जनता कभी नहीं भूलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक माँ होने के नाते वह किसी भी माँ का अपमान करने की सोच भी नहीं सकतीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया और संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का विरोध कर महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई गई। उन्होंने कहा कि अब देश की नारी जाग चुकी है और अपने अधिकारों के लिए पूरी ताकत से खड़ी है।

महापौर ने बुधवार को उनके आवास पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी नामपट्टिका पर जूता चलाना न केवल उनके पद का, बल्कि पूरे शहर की गरिमा का अपमान है। उन्होंने इसे लखनऊ की प्रथम नागरिक और एक सैनिक परिवार की महिला पर हमला बताया।

सदन में इस पूरे घटनाक्रम की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे 119 में से 93 पार्षदों ने सर्वसम्मति से पारित किया। महापौर ने इस समर्थन के लिए सभी पार्षदों और लखनऊ की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव नारी सम्मान के पक्ष में एक मजबूत संदेश है और उन लोगों के लिए जवाब है जिन्होंने महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई।

अंत में महापौर ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और नारी सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि लखनऊ की जनता न्याय और सम्मान के इस प्रयास में हमेशा साथ खड़ी रहेगी।

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