केरल के रेस्टोरेंट के ‘विशु’ विज्ञापन पर भारी बवाल
चिकन बिरयानी के साथ बाल कृष्ण की तस्वीर दिखाने पर भड़के लोग

धार्मिक भावनाओं और विज्ञापन की दुनिया के बीच एक बार फिर बड़ा टकराव देखने को मिला है। 18 अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल के एक रेस्टोरेंट द्वारा ‘विशु’ (Vishu) त्योहार के अवसर पर जारी किए गए विज्ञापन ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। इस विज्ञापन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को मांसाहारी भोजन (चिकन बिरयानी) के साथ दिखाया गया है, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों का भारी आक्रोश फूट पड़ा है।
विवाद का मुख्य कारण:
यह पूरा विवाद केरल स्थित ‘मेहर मंडी एंड ग्रिल्स’ (Meher Mandi & Grills) नामक रेस्टोरेंट के एक प्रमोशनल विज्ञापन से शुरू हुआ। विशु के पावन अवसर पर रेस्टोरेंट ने जो घोषणा की, उसमें भगवान कृष्ण के बाल रूप (बाल कृष्ण) को एक केले के पत्ते पर परोसी गई चिकन बिरयानी और अन्य व्यंजनों के ठीक बगल में बैठे हुए ग्राफिक के जरिए दर्शाया गया है।
हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण को पूर्णतः सात्विक माना जाता है और उन्हें ‘माखन चोर’ के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में उनके पवित्र स्वरूप के साथ मांसाहारी भोजन का ऐसा चित्रण व्यापक स्तर पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला माना जा रहा है।
इंटरनेट पर फूटा गुस्सा: “सहिष्णुता की भी सीमा होती है”
जैसे ही यह विज्ञापन सोशल मीडिया पर सामने आया, यह तेज़ी से वायरल हो गया और लोगों ने इसकी कड़ी निंदा शुरू कर दी। आम जनता और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इस विज्ञापन को हिंदू देवी-देवताओं का घोर अपमान और धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है।
सोशल मीडिया पर विरोध का स्तर इस कदर है कि लोग इसे एक सोची-समझी साजिश करार दे रहे हैं। एक यूज़र की टिप्पणी, “सहिष्णुता की भी एक सीमा होती है” (Tolerance Has Its Limits), इस पूरे विवाद में लोगों की हताशा और गुस्से को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। भारी संख्या में लोग अब इस रेस्टोरेंट के बहिष्कार (Boycott) की मांग कर रहे हैं और प्रशासन से सख्त कानूनी कार्रवाई की अपील कर रहे हैं।
सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भ:
‘विशु’ केरल का एक अत्यंत प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जिसे मलयाली नव वर्ष के रूप में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन घरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और पारंपरिक रूप से पूरी तरह सात्विक भोजन (विशु साध्या) ग्रहण करने का विशेष महत्व होता है। ऐसे पवित्र दिन के अवसर पर भगवान के साथ मांसाहारी भोजन का प्रचार करना, व्यावसायिक लाभ के लिए धार्मिक प्रतीकों के अनुचित उपयोग की एक गंभीर मिसाल बन गया है।
यह ताज़ा घटना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि विज्ञापन और मार्केटिंग की दुनिया में रचनात्मकता (creativity) के नाम पर धार्मिक संवेदनशीलता की अनदेखी करना ब्रांड्स के लिए कितना नुकसानदायक साबित हो सकता है। यह मामला न केवल एक रेस्टोरेंट की मार्केटिंग टीम की भारी चूक है, बल्कि समाज में धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस भारी विरोध के बाद रेस्टोरेंट प्रबंधन सार्वजनिक रूप से माफी मांगता है या प्रशासन इस मामले में कोई कानूनी कदम उठाता है।



