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अमरावती बनी आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी, केंद्र ने जारी किया नोटिफिकेशन

(विवेक ओझा): 2014 में जब आंध्र प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ और तेलंगाना 2 जून , 2014 को अस्तित्व में आया और भारत का नवीनतम राज्य बना तब से इस बात पर जोर दिया जा रहा था कि आंध्र प्रदेश की एक पृथक स्थाई राजधानी हो, इसके विकास और प्रगति के सारे मानदंड ठीक तरीके से निर्धारित किए जाएं। 2014 में यह तय किया गया था कि हैदराबाद 2024 तक ही दोनों की संयुक्त राजधानी रहेगा और 2024 के बाद आंध्र प्रदेश के लिए एक नई राजधानी का चयन करना होगा । 2014 में अविभाजित आंध्र प्रदेश के विभाजन के समय हैदराबाद को 10 वर्षों के लिए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाया गया था और अब आंध्र प्रदेश की अमरावती को अब आधिकारिक और स्थायी राजधानी का दर्जा मिल गया है। इस संबंध में भारत सरकार ने सोमवार ( 6 अप्रैल ) को गजट नोटिफिकेशन जारी किया। यह फैसला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद लिया गया, जिन्होंने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को अनुमोदित किया था। यह विधेयक पिछले सप्ताह संसद से पारित हुआ था। कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026 को 2 जून 2024 से प्रभावी माना जाएगा।

इस संशोधन से 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव किया गया। अधिनियम के अनुसार, ‘अमरावती’ में आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिनियम, 2014 के तहत घोषित राजधानी क्षेत्र भी शामिल है। संसद ने 2 अप्रैल को अंतिम मंजूरी दी और अमरावती को आधिकारिक राजधानी घोषित किया। राज्यसभा ने बिल को वॉइस वोट से पास किया, जबकि लोकसभा ने इसे एक दिन पहले मंजूरी दी।

इस कानून से सालों की राजनीतिक असमंजस और तीन-राजधानी मॉडल की चर्चाओं को समाप्त किया गया है। अब भविष्य में राजधानी बदलने या तीन-राजधानी योजना को लागू करने के प्रयास असंभव होंगे। संसद में बिल पर कुल 35 सांसदों ने बहस की। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के दो सांसदों को छोड़कर सभी सांसदों ने बिल का समर्थन किया। वाईएसआरसीपी ने इसे किसान हितों की अनदेखी बताते हुए विरोध किया, क्योंकि किसानों ने राज्य की राजधानी के विकास के लिए अपनी जमीन दी थी।

अमरावती को राजधानी बनाने की नींव 2015 में तेलुगु देशम पार्टी के शासनकाल में रखी गई थी। 2019 में वाईएसआरसीपी के सत्ता में आने के बाद अमरावती के सभी प्रोजेक्ट रोक दिए गए और तीन-राजधानी विचार सामने आया। हालांकि, 2024 में टीडीपी-नेता एनडीए के सत्ता में लौटने के बाद, अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने का फैसला किया गया और परियोजनाओं को पिछले साल फिर से शुरू किया गया था।

अमरावती के विकास की रूपरेखा तय :

भारत की पहली अमरावती क्वांटम वैली (Amaravati Quantum Valley) आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में स्थापित की जाएगी। यह नेशनल क्वांटम मिशन के तहत विकसित किया जा रहा एक प्रमुख अनुसंधान और नवाचार केंद्र है, जिसका उद्देश्य भारत को क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनाना है। यहाँ 50 एकड़ की सुविधा में आठ विशेष टावर बनाए जाएंगे, जो ‘क्वांटम कंप्यूटिंग विलेज’ के रूप में काम करेंगे। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत के महत्त्वाकांक्षी नेशनल क्वांटम मिशन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश के अमरावती में अमरावती क्वांटम सेंटर की आधारशिला फरवरी 2026 में रखी है। पिछले साल भी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के अमरावती में 58 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास कर उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया था।

विश्व बैंक (World Bank) आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती के विकास के लिए प्रमुख वित्तीय भागीदार है, जिसने चरण-I के बुनियादी ढांचे के लिए [एशियाई विकास बैंक (ADB) के साथ मिलकर $1600 मिलियन (कुल, लगभग ₹13,600 करोड़) से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है।

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