उत्तर प्रदेश में अब बिना आयुष्मान कार्ड के भी मिलेगा 5 लाख तक मुफ्त इलाज

राघवेन्द्र प्रताप सिंह: महंगे इलाज की बढ़ती लागत ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों का सामना करना बेहद मुश्किल बना दिया है. इसी चुनौती को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू की है. यह योजना उन जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत लेकर आई है, जो किसी कारणवश आयुष्मान भारत योजना के दायरे में शामिल नहीं हो पाए हैं। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस और मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है. खास बात यह है कि इसका लाभ सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी लिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना में 25,000 से अधिक बीमारियों और सर्जरी को शामिल किया गया है. इसमें हृदय रोग, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, न्यूरोसर्जरी जैसी जटिल और महंगी चिकित्सा सेवाएं भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब परिवार केवल आर्थिक तंगी के कारण जीवन रक्षक उपचार से वंचित न रहे। योजना के माध्यम से समय पर इलाज मिलने से न केवल मरीजों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि परिवारों को कर्ज और आर्थिक संकट से भी बचाया जा सकता है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है. साथ ही वह असहाय, गरीब या बीपीएल श्रेणी में आता हो। आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इच्छुक लाभार्थी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं या संबंधित कार्यालय में जाकर ऑफलाइन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, राशन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र शामिल हैं। सत्यापन के बाद पात्र परिवारों को एक ‘गोल्डन कार्ड’ जारी किया जाता है, जिसके जरिए अस्पताल में सीधे कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है।
मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है. यह पहल न केवल इलाज का खर्च कम करने में मददगार है, बल्कि गरीब परिवारों को सम्मानजनक और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का माध्यम भी बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, तो यह प्रदेश में स्वास्थ्य असमानता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



