मुल्लापेरियार बांध विवाद: केरल के मंत्री का आरोप- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का नहीं हुआ पालन, तमिलनाडु द्वारा जलस्तर बढ़ाने पर कड़ी आपत्ति
विवेक ओझा/ केरल: भारत के संघीय ढांचे में अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद हमेशा से एक जटिल प्रशासनिक और संवैधानिक चुनौती रहे हैं। इसी क्रम में केरल और तमिलनाडु के बीच ऐतिहासिक मुल्लापेरियार बांध (Mullaperiyar dam) को लेकर तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया है। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, केरल के एक मंत्री ने इस अंतर-राज्यीय बांध के प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
केरल के मंत्री ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि मुल्लापेरियार बांध के सुरक्षित संचालन और जल प्रबंधन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट (SC) के दिशा-निर्देशों का अभी तक पालन नहीं किया गया है (unimplemented)। मुल्लापेरियार बांध भौगोलिक रूप से केरल में स्थित है, लेकिन औपनिवेशिक काल के एक समझौते के तहत इसका संचालन और रखरखाव तमिलनाडु सरकार द्वारा किया जाता है। यह अनूठी व्यवस्था अक्सर दोनों राज्यों के बीच कानूनी और राजनीतिक टकराव का कारण बनती है।
सुरक्षा चिंताओं को रेखांकित करते हुए, केरल सरकार ने जलस्तर को लेकर अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। मंत्री ने तमिलनाडु (T.N.) द्वारा बांध के जलस्तर में किसी भी प्रकार की वृद्धि (water level hike) किए जाने के संभावित कदम पर अपनी कड़ी आपत्ति (objects) दर्ज कराई है। केरल लंबे समय से इस 100 साल से अधिक पुराने बांध की संरचनात्मक मजबूती और अत्यधिक जलभराव से निचले इलाकों (विशेषकर इडुक्की जिले) में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताता रहा है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशों की कथित अवहेलना का यह मुद्दा दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच कानूनी और जल-बंटवारे की लड़ाई को एक नया मोड़ दे सकता है।