पूर्वोत्तर में चुनावी तैयारियां तेज: चुनाव आयोग ने असम और नागालैंड में मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण का किया ऐलान, अक्टूबर में होगा अंतिम प्रकाशन

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ गुवाहाटी/नई दिल्ली: भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) ने पूर्वोत्तर भारत के दो अहम राज्यों—असम और नागालैंड—में चुनावी तैयारियों को तेज करते हुए मतदाता सूचियों (Electoral Rolls) के ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (Special Summary Revision) कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, यह व्यापक अभियान इसी महीने से शुरू होकर अगले कुछ महीनों तक चलेगा, और पूरी तरह से अपडेटेड (Updated) व त्रुटिहीन मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन अक्टूबर 2026 में किया जाएगा।
क्यों हो रहा है यह विशेष पुनरीक्षण?
असम और नागालैंड में जनसांख्यिकीय (Demographic) बदलावों और हाल ही में हुए परिसीमन (Delimitation) के बाद मतदाता सूचियों को पूरी तरह से सटीक बनाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके अलावा, हजारों नए युवा (जो 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष के हो चुके हैं) पहली बार वोटर बनने के योग्य हुए हैं।
आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे, और फर्जी या मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाएं।
कैसे चलेगा अभियान?
असम और नागालैंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) ने बताया कि यह अभियान कई चरणों में चलाया जाएगा:
* डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन: बूथ लेवल अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। वे जीपीएस (GPS) और चुनाव आयोग के गरुड़ ऐप (Garuda App) का उपयोग करेंगे ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
* दावे और आपत्तियां (Claims & Objections): अगस्त और सितंबर महीने में नागरिक मतदाता सूची के ड्राफ्ट को देखकर अपने नाम जोड़ने, हटाने या पता बदलवाने (फॉर्म 6, 7 और 8) के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह सुविधा ऑफलाइन के साथ-साथ ‘वोटर हेल्पलाइन ऐप’ के माध्यम से ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी।
असम में विशेष सतर्कता
असम में एनआरसी (NRC) और विदेशी नागरिकों के मुद्दे के कारण मतदाता सूची का पुनरीक्षण हमेशा एक संवेदनशील विषय रहा है। चुनाव आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) को सख्त निर्देश दिए हैं कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी वैध भारतीय नागरिक का नाम बिना उचित जांच के न काटा जाए। वहीं नागालैंड में दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले जनजातीय समुदायों तक पहुंचने के लिए विशेष जागरूकता वैन और शिविर लगाए जाएंगे। अक्टूबर में सूची के अंतिम प्रकाशन के साथ ही इन राज्यों में भविष्य के चुनावों की ठोस रूपरेखा तैयार हो जाएगी।



