संसद का मानसून सत्र: सरकार का फुल एक्शन प्लान तैयार, पूर्ण बजट के साथ पेश होगा बहुप्रतीक्षित डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) नियमों का ड्राफ्ट

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: नई सरकार के गठन के बाद संसद का आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) देश की भावी आर्थिक और तकनीकी दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने आज स्पष्ट किया है कि 22 जुलाई से शुरू होने वाले इस सत्र में सरकार का एजेंडा पूरी तरह से सेट है। इस सत्र के दौरान सरकार सदन के पटल पर वर्ष 2026-27 का पूर्ण आम बजट (Full Budget) पेश करने के साथ-साथ देश के टेक सेक्टर द्वारा लंबे समय से प्रतीक्षित ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण’ (Digital Personal Data Protection – DPDP) अधिनियम के नए नियमों का मसौदा भी प्रस्तुत करेगी।
बजट 2026-27 से क्या हैं उम्मीदें?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाने वाला यह बजट ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का आधार स्तंभ माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि बजट में बुनियादी ढांचे (Infrastructure), रक्षा, कृषि और रोजगार सृजन पर भारी आवंटन किया जाएगा। इसके अलावा, मध्यम वर्ग को आयकर (Income Tax) स्लैब में बहुप्रतीक्षित राहत मिलने की भी उम्मीदें बाजार में जोरों पर हैं। विपक्षी गठबंधन (INDIA) के मजबूत संख्याबल को देखते हुए इस बार बजट पर चर्चाओं का बेहद तीखा और हंगामेदार होना तय माना जा रहा है।
DPDP नियम: डिजिटल दुनिया का नया कानून
बजट से इतर, तकनीकी और कॉर्पोरेट जगत की सबसे बड़ी नजरें DPDP नियमों पर टिकी हैं। गौरतलब है कि संसद ने पिछले साल ही डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून पारित किया था, लेकिन इसके नियम (Rules) अभी तक अधिसूचित नहीं हुए थे। संसदीय कार्य मंत्री के अनुसार, अब सरकार ने इसका पूरा मसौदा (Draft) तैयार कर लिया है, जिसे सदन में बहस और अनुपालन के लिए रखा जाएगा।
* क्या बदलेगा? इन नियमों के लागू होने के बाद गूगल, मेटा (फेसबुक/व्हाट्सएप), और अमेज़ॅन जैसी बड़ी टेक कंपनियों के लिए भारतीय यूज़र्स का डेटा मनमाने ढंग से प्रोसेस करना या बेचना असंभव हो जाएगा।
* यूज़र्स को अधिकार: किसी भी ऐप को यूज़र की स्पष्ट और ‘सहमति’ (Consent) लेनी होगी, जो क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होनी चाहिए।
* डेटा ब्रीच पर भारी जुर्माना: यदि किसी कंपनी के सर्वर से यूज़र्स का डेटा चोरी (Data Breach) होता है, तो नए नियमों के तहत उन पर 250 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का स्पष्ट तंत्र निर्धारित किया गया है।
विपक्ष का संभावित रुख
विपक्षी दलों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे बजट में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरेंगे। वहीं, DPDP नियमों पर विपक्ष का आरोप है कि इसमें सरकारी एजेंसियों को डेटा एक्सेस के लिए बहुत अधिक छूट (Exemptions) दी गई है, जिसे वे निजता के अधिकार का उल्लंघन मानते हैं। कुल मिलाकर, यह मानसून सत्र न केवल भारत के आर्थिक भविष्य बल्कि करोड़ों इंटरनेट यूज़र्स की डिजिटल निजता (Digital Privacy) के लिहाज से एक ऐतिहासिक सत्र साबित होने वाला है।



