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भारत-रूस कूटनीति में ऐतिहासिक मील का पत्थर: ‘आर्थिक सहयोग 2030’ के नौ प्रमुख क्षेत्रों पर लगी मुहर, रुपये-रूबल तंत्र को मिलेगी नई ताकत

विवेक ओझा/ मॉस्को/नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच 22वें वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई और मजबूत दिशा प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मॉस्को में हुई गहन और सफल वार्ता के बाद एक साझा संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें ‘भारत-रूस आर्थिक सहयोग 2030’ (India-Russia Economic Cooperation 2030) के विजन डॉक्यूमेंट पर ऐतिहासिक मुहर लगाई गई है। यह समझौता पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच एक स्पष्ट संकेत है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए रूस के साथ अपने संबंधों को और गहरा कर रहा है।

सहयोग के 9 प्रमुख स्तंभ

इस विजन डॉक्यूमेंट के तहत दोनों देशों ने व्यापार, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए नौ प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है।
1. रुपये-रूबल (Rupee-Ruble) व्यापार तंत्र: सबसे महत्वपूर्ण समझौता द्विपक्षीय व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को लेकर हुआ है। पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण डॉलर में व्यापार करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए दोनों देश रुपये और रूबल में निर्बाध व्यापार तंत्र विकसित करेंगे, जिससे ऊर्जा और रक्षा उपकरणों का भुगतान आसान हो जाएगा।
2. नौसेना और समुद्री सहयोग: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और आर्कटिक (Arctic) रूट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों की नौसेनाएं संयुक्त गश्त और सूचना साझाकरण (Information Sharing) बढ़ाएंगी।
3. डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी सहयोग: ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (DPI) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत और रूस एक साथ मिलकर काम करेंगे।
4. ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): रूस भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना रहेगा। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा (विशेषकर कुडनकुलम के नए रिएक्टर्स) पर भी सहमति बनी है।
5. कृषि और उर्वरक (Fertilizers): भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस से रियायती दरों पर उर्वरकों की दीर्घकालिक आपूर्ति का समझौता।
6. इन्फ्रास्ट्रक्चर और परिवहन: ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) के माध्यम से माल ढुलाई के समय और लागत को कम करने पर विशेष जोर।
7. फार्मास्युटिकल्स और स्वास्थ्य: भारतीय दवा कंपनियों के लिए रूसी बाजार के दरवाजे खोलना।
8. स्पेस एक्सप्लोरेशन: गगनयान मिशन और सैटेलाइट नेविगेशन में तकनीकी सहयोग।
9. सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान: छात्रों और पेशेवरों के लिए वीजा नियमों में ढील।

व्यापार घाटा कम करने पर जोर

इस शिखर वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से 65 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार में भारत के भारी व्यापार घाटे (Trade Deficit) का मुद्दा उठाया। पुतिन ने आश्वस्त किया है कि रूस भारतीय कृषि उत्पादों, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और फार्मा कंपनियों के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करेगा। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह समझौता 2030 तक भारत और रूस के बीच व्यापार को 100 अरब डॉलर के लक्ष्य तक ले जाने में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।

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