क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस? जानिए इसके फायदे, महत्व और इस साल की थीम
नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : हर साल 14 जून को दुनिया भर में विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) मनाया जाता है। ये सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों को सलाम करने का दिन है जो बिना किसी स्वार्थ के अपना खून दान करके किसी और की जिंदगी बचाते हैं।
विश्व रक्तदाता दिवस दुनिया भर में रक्तदान के महत्व को बढ़ावा देने और स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। यह दिन उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर भी है, जो अपने रक्तदान से अनगिनत जिंदगियों को बचाने में योगदान देते हैं।
भारत जैसे विशाल देश में, जहां सड़क दुर्घटनाओं, प्रसव संबंधी जटिलताओं, कैंसर, थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों के मरीजों को नियमित रक्त की आवश्यकता पड़ती है, वहां स्वैच्छिक रक्तदान केवल सामाजिक सेवा नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बन चुका है।
विश्व रक्तदाता दिवस की थीम-
विश्व रक्तदाता दिवस को हर साल एक थीम के द्वारा मनाया जाता है। इस साल की थीम की बात करें तो इस साल विश्व रक्तदाता दिवस 2026 की थीम है “मानवता की एक बूंद। रक्तदान करें, जीवन बचाएं। “
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल करोड़ों यूनिट खून की जरूरत पड़ती है, लेकिन कई देशों में इसकी कमी बनी रहती है, खासकर भारत जैसे देशों में जहां जनसंख्या ज्यादा है लेकिन स्वैच्छिक रक्तदान की रफ्तार अभी भी जरूरत से कम है। इसी कमी को पूरा करने के लिए हर साल जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं ताकि लोग आगे आएं और नियमित रूप से रक्तदान करें।
विश्व रक्तदाता दिवस का इतिहास :
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज (IFRC), इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (ISBT) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लड डोनर ऑर्गेनाइजेशन्स (IFBDO) ने मिलकर इस दिवस की शुरुआत की थी। पहली बार इसे वर्ष 2004 में मनाया गया था।
विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) हर साल 14 जून को कार्ल लैंडस्टीनर (Karl Landsteiner) की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। कार्ल लैंडस्टीनर ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और चिकित्सक थे, जिन्होंने ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी, जिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।




