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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी तेज

कांग्रेस ने नीरज डांगी को उतारा मैदान में, बीजेपी ने घोषित किए दो उम्मीदवार

जयपुर (राघवेंद्र प्रताप सिंह): राजस्थान की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात पूरी तरह से बिछ चुकी है। राज्य की खाली हो रही सीटों पर होने वाले इस चुनावी मुकाबले के लिए दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। कांग्रेस आलाकमान ने एक बड़ा दांव खेलते हुए वरिष्ठ नेता नीरज डांगी को राजस्थान से अपना आधिकारिक राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए दो मजबूत उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर मैदान को बेहद दिलचस्प बना दिया है। इन घोषणाओं के बाद से ही जयपुर के सियासी गलियारों में अंकगणित और जोड़-तोड़ की चर्चाएं चरम पर पहुँच गई हैं।

कांग्रेस का नीरज डांगी पर भरोसा
नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने संगठन के प्रति समर्पित और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। डांगी लंबे समय से पार्टी के विभिन्न सांगठनिक पदों पर रहे हैं और राज्य के सामाजिक समीकरणों में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। पार्टी के भीतर चल रही कई खींचतान के बीच उनके नाम पर मुहर लगना यह दिखाता है कि आलाकमान इस समय किसी भी प्रकार का आंतरिक जोखिम नहीं उठाना चाहता और एक सुरक्षित चेहरे के साथ उच्च सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है।

बीजेपी की दो सीटों पर नजर और चुनावी समीकरण
बीजेपी ने इस चुनाव में दो उम्मीदवारों को उतारकर अपनी आक्रामक रणनीति साफ कर दी है। विधानसभा में पार्टी के पास मौजूद विधायकों की संख्या और निर्दलीय व अन्य छोटे दलों के झुकाव को देखते हुए बीजेपी का पलड़ा काफी मजबूत नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के दोनों प्रत्याशी न केवल अपनी सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए पर्याप्त आंकड़े रखते हैं, बल्कि वे विपक्षी खेमे में भी सेंधमारी करने की पूरी क्षमता रखते हैं।

अंकगणित और प्रतिष्ठा की लड़ाई
राज्यसभा की इन सीटों पर होने वाला मतदान केवल नंबर्स का खेल नहीं है, बल्कि यह दोनों ही दलों के प्रदेश नेतृत्व के लिए साख और प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मतदान के दिन क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता, यही वजह है कि दोनों पार्टियों ने अपने-अपने विधायकों की घेराबंदी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में नामांकन दाखिले के साथ ही यह सियासी जंग और तेज होगी, और यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि उच्च सदन के इस दंगल में कौन सा दल बाजी मारता है।

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