पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा भूचाल
टीएमसी में ऐतिहासिक टूट, पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने बुलाई आपात बैठक

[ अभिषेक सिंह ] पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा भूचाल आ गया है। राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद से ही संघर्ष कर रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अपने सबसे गहरे आंतरिक संकट से गुजर रही है। ताज़ा घटनाक्रम के अनुसार, टीएमसी के संसदीय दल में एक बड़ी टूट की खबर सामने आई है, जिसने राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीति में खलबली मचा दी है। इस अप्रत्याशित संकट को देखते हुए और डैमेज कंट्रोल के प्रयास में, पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने सभी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।
पार्टी के भीतर असंतोष का विस्फोट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर यह दरार अचानक नहीं आई है, बल्कि सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही यह चिंगारी सुलग रही थी। पार्टी के कई वरिष्ठ सांसद और विधायक शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली और भविष्य की राजनीतिक दिशा से नाखुश बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो संसदीय दल का एक बड़ा धड़ा पार्टी से अलग होकर नया गुट बनाने या किसी अन्य राष्ट्रीय पार्टी में विलय करने पर विचार कर रहा है। अगर यह टूट औपचारिक रूप ले लेती है, तो यह ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका होगा।
ममता बनर्जी का डैमेज कंट्रोल प्लान
इस बड़े राजनीतिक संकट को भांपते हुए, पूर्व सीएम ममता बनर्जी तुरंत हरकत में आ गई हैं। उन्होंने कोलकाता में अपने आवास पर पार्टी के कोर कमेटी के सदस्यों, बचे हुए सांसदों और विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बागियों को मनाना और पार्टी को पूरी तरह से बिखरने से रोकना है। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी इस बैठक में पार्टी के भीतर एक नए सिरे से विश्वास जगाने की कोशिश करेंगी और असंतुष्ट नेताओं की शिकायतों को दूर करने का कोई फॉर्मूला पेश कर सकती हैं।
क्या होगा बंगाल की राजनीति का भविष्य?
टीएमसी में हो रही यह टूट पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख देगी। एक समय में राज्य की अजेय ताकत मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। विरोधी दल इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और टीएमसी के बागी नेताओं को अपने पाले में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
अब सबकी निगाहें ममता बनर्जी की इस आपातकालीन बैठक पर टिकी हैं। क्या ‘दीदी’ अपने राजनीतिक कौशल का इस्तेमाल करते हुए इस महासंकट से पार्टी को उबार पाएंगी, या फिर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का यह पतन एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत करेगा? आने वाले कुछ दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।



