Trending

जल शक्ति मंत्री ने दिये जरूरी निर्देश

लखनऊ। मंत्री, जल शक्ति स्वतत्रं देव सिंह द्वारा नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अन्तर्गत जल निगम (ग्रामीण), राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, भूगर्भ जल विभाग, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन एवं लघु सिंचाई विभाग की समीक्षा, जल निगम (ग्रामीण) के सभागार में की गयी। जिसमें अपर मुख्य सचिव, नमामि गगं े तथा गा्रमीण जलापूर्ति विभाग, प्रबन्ध निदेशक, उप्र जल निगम (ग्रामीण), परियोजना निदेशक, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, अधिशासी निदेशक, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, निदेशक, भूगर्भ जल विभाग उपस्थित रहे। मंत्री द्वारा सभी विभागों की विस्तृत समीक्षा करने के उपरान्त निम्नलिखित निर्देश दिये गयेः-

नमामि गंगे के तहत चल रही विभिन्न योजनाएं, जिनमें सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) निर्माणाधीन हैं, को समयान्तर्गत पूर्ण कर लंे तथा यह सुनिश्चित करें कि कोई भी नाला बिना शोधन के नदी में न जाये, इसके लिए कार्ययोजना के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करायें, इसी के साथ-साथ मंत्री द्वारा अपेक्षा की गयी, कि प्रदेश के 05 बड़े शहर जो गंगा एवं यमुना के तट पर स्थित है यथा-प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, मथुरा, आगरा इस के साथ-साथ लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर आदि को सीवेज शोधन संयंत्र की आवश्यकतानुसार संतृप्त कराये जायें, ताकि कोई नाला बिना शोधन के नदियों में न जाये। उक्त के अतिरिक्त मंत्री द्वारा निर्देशित किया गया कि छोटी नदियों के पुनरोद्धार हेतु डिस्ट्रिक्ट रिवर रिजुवेनेशन प्लान के तहत प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित किया जाये एवं प्रदेश में लागू ‘‘शोधित जल के पुर्नउपयोग नीति’’ से सम्बन्धित सभी विभागों से समन्वय स्थापित करते हुए पॉलिसी का प्रभावी क्रियान्वयन कराया जाये।

गर्मियों के मौसम के दृष्टिगत अधिक से अधिक गॉवों में जल जीवन मिशन एवं जल निगम (ग्रामीण) की योजनाओं के माध्यम से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाये तथा नियमित जलापूर्ति में आने वाली समस्याओं का ससमय निराकरण कराया जाये।

मंत्री द्वारा यह भी अपेक्षा की गई, कि ऐसे जनपद जो गुणवत्ता एवं मात्रा (फ-फ) प्रभावित हैं, जैसे आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, उन्नाव, बलिया इत्यादि जिनमें जल जीवन मिशन फेज-4 के तहत सतही जल आधारित योजनाओं का कार्य प्रगति पर है, जिनको पूर्ण करने में अभी समय लगेगा उनमें वर्तमान आवश्यकता को देखते हुए विभिन्न योजनाओं के तहत लगाये गये लगभग 8000 नग से अधिक टैंक टाइप स्टैण्ड पोस्ट (टी0टी0एस0पी0) संचालित कर लिये जायें, यदि कहीं पर टैंक टाइप स्टैण्ड पोस्ट (टीटीएसपी) के मरम्मत/अनुरक्षण की आवश्यकता हो तो उनका परीक्षण कराते हुए आगामी 15 दिनांे में मरम्मत का कार्य पूर्ण कराते हुए सभी टीटीएसपी संचालित कर लिये जायें, ताकि गुणवत्ता एवं मात्रा प्रभावित क्षेत्र के लोगों का शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। उक्त के अतिरिक्त मंत्री ने गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए निर्देशित किया कि ऐसे क्षेत्रों में स्थापित समस्त आर्सेनिक रिमूवल यूनिट (ए0आर0यू0)/फ्लोराइड रिमूवल यूनिट (एफ0आर0यू0) को पूर्ण क्रियाशील करते हुए उनसे शुद्ध जलापूर्ति सुनिश्चित की जाये।

मंत्री जी द्वारा भूगर्भ जल विभाग की समीक्षा के दौरान पिछले 8-9 वर्षों में अतिदोहित श्रेणी के विकास खण्डों की संख्या में कमी पायी गयी। विभिन्न विभागों के द्वारा भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा पोषित योजनाओं के माध्यम से किये गये जल संचयन के कार्यों के समेकित परिणामों के फलस्वरूप जहॉ वर्ष 2017 में प्रदेश के 82 विकास खण्ड अतिदोहित श्रेणी में वर्गीकृत थे, वहीं पर वर्ष 2025 के आंकलन के अनुसार यह संख्या घटकर अब 44 हो गयी।

मंत्री द्वारा यह भी निर्देश दिये गये, कि ऐसे 10 शहर जहॉ भू-जल की स्थिति संकटग्रस्त है, वहॉ पर व्यापक जल जागरूकता अभियान चलाते हुए भू-जल की संकटग्रस्त स्थिति में सुधार लाने हेतु प्रयास किया जायें। इस हेतु सभी स्टके होल्डर्स यथा जिला प्रशासन, औद्योगिक निकायों, विभिन्न गैर सरकारी संगठनों/शासकीय विभागों के साथ भू-जल संरक्षण हेतु कार्यशालाएं आयोजित करते हुए बेहतर परिणाम लाये जायें।

Related Articles

Back to top button