देश में खरीफ बुवाई सत्र के लिए उर्वरक का पर्याप्त भंडार

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में उर्वरकों का ‘पर्याप्त भंडार है। सरकार ने कहा कि आगामी खरीफ सत्र के दौरान उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने नई दिल्ली में पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि प्रमुख उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) स्थिर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की उर्वरक सुरक्षा स्थिति संतोषजनक एवं सुव्यवस्थित है।
उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव ने कहा कि खरीफ सीजन के लिए कृषि और किसान कल्याण विभाग ने उर्वरक की जरूरत का आकलन किया है, उसके आधार पर मौजूदा स्टॉक 51 फीसदी से अधिक है। उन्होंने बताया कि यह उस सामान्य जरूरत के स्तर से काफी ज्यादा है, जिसे हम आमतौर पर 33 फीसदी पर बनाए रखते हैं। इसलिए, उर्वरक का स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है।
अपर्णा एस. शर्मा ने संवाददाताओं को बताया कि मुख्य उर्वरकों का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पहले जैसा ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के दौर के बाद उर्वरकों का घरेलू उत्पादन और आयात बढ़कर 76.78 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) और आयात 19.94 एलएमटी तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति के बाद कुल 97 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्धता में जोड़े गए हैं।
शर्मा ने कहा कि यह भंडार सामान्य स्तर (करीब 33 फीसदी) से काफी अधिक है। कृषि विभाग ने खरीफ के लिए उर्वरकों की कुल आवश्यकता 390.54 लाख टन आंकी है। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक स्रोतों से सात लाख टन ‘एनपीके कॉम्प्लेक्स’ सुरक्षित किए हैं। इसके अलावा देश के लिए 12 लाख टन डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट), चार लाख टन ट्रिपल सुपर फॉस्फेट और तीन लाख टन अमोनियम सल्फेट भी सुनिश्चित किए गए हैं। इससे अगले 15-20 दिन में शुरू होने वाले सबसे अधिक मांग के समय में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी।
उन्होंने बताया कि सचिवों का एक अधिकार प्राप्त समूह इस स्थिति की साप्ताहिक समीक्षा कर रहा है। उर्वरक विभाग ने पिछले सप्ताह जानकारी दी थी कि मार्च-अप्रैल के दौरान घरेलू उत्पादन 67.76 लाख टन रहा है। इसमें यूरिया (40.72 लाख टन), डीएपी (5.39 लाख टन), एनपीके (13.65 लाख टन) और एसएसपी (आठ लाख टन) शामिल हैं।



