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हॉर्मुज में कोहराम : IRGC ने भारतीय तेल टैंकरों पर झोंकी गोलियां, नई दिल्ली ने ईरानी राजदूत को किया तलब

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) द्वारा की गई कथित गोलीबारी के बाद भारतीय जहाजों को अपना रास्ता बदलकर वापस लौटना पड़ा। इस घटना ने न केवल समुद्री सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (Global Oil Supply Chain) को भी हिलाकर रख दिया है।

 

20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहे ‘जग अर्नव’ पर फायरिंग

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दो भारतीय जहाज ‘जग अर्नव’ (Jag Arnav) और ‘सन्मार हेराल्ड’ (Sanmar Herald) इस खतरनाक घटनाक्रम के बीच फंस गए थे। इनमें से ‘जग अर्नव’, जो लगभग 20 लाख बैरल इराकी कच्चा तेल लेकर जा रहा था, को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया।

 

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, ओमान के उत्तर-पूर्व में ईरान की दो गनबोट्स ने अचानक टैंकर पर फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि, राहत की बात यह रही कि हमले में किसी भी चालक दल के सदस्य को चोट नहीं आई और सभी सुरक्षित हैं।

 

भारत का कड़ा रुख: ईरानी राजदूत तलब

भारत सरकार ने इस घटना को ‘बेहद गंभीर’ मानते हुए कड़ा राजनयिक रुख अपनाया है। दिल्ली में तैनात ईरानी राजदूत को तलब कर भारत ने इस हमले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने ईरान से इस घटना पर तुरंत स्पष्टीकरण मांगा है और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

 

50 दिन बाद खुला था रास्ता, फिर लगी पाबंदी

चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 50 दिनों के कड़े प्रतिबंधों के बाद शुक्रवार को ही इस मार्ग को अस्थायी रूप से खोला गया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि तनाव कम होगा, लेकिन शनिवार को ईरान ने फिर से पाबंदियां लागू कर दीं। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों के प्रतिशोध में की गई है।

 

भारतीय नौसेना अलर्ट पर

घटना के तुरंत बाद भारतीय नौसेना ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर कोई भारतीय युद्धपोत मौजूद नहीं है, लेकिन ओमान की खाड़ी में नौसेना के जहाज मुस्तैद हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस अहम समुद्री मार्ग में ‘सुरक्षित और मुक्त आवाजाही’ (Free and Open Navigation) का पूर्ण समर्थन करता है।

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए इस मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर है।

 

तेल की कीमतें: इस तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है।

 

क्षेत्रीय अस्थिरता: इजरायल-ईरान संघर्ष और अमेरिका के कड़े रुख के बीच यह फायरिंग पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध की आग में झोंक सकती है।

 

फिलहाल, भारतीय जहाज सुरक्षित ठिकानों की ओर लौट रहे हैं, लेकिन इस घटना ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

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