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खेल विभाग में सख्ती, कोचों की बायोमेट्रिक निगरानी और ऑनलाइन मॉनिटरिंग का फैसला

लखनऊ। खेल विभाग में अनुशासन और प्रशिक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। सचिव, खेल, उत्तर प्रदेश शासन सुहास एलवाई ने मंगलवार को खेल निदेशालय का निरीक्षण किया और विभाग के अंतर्गत कार्यरत कोचों व प्रशिक्षकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की।

खेल निदेशालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए सचिव, खेल ने प्रशिक्षकों की उपस्थिति, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए।

बैठक में निदेशक, खेल डॉ.आरपी सिंह, विशेष सचिव कुमार विनीत, संयुक्त निदेशक आरएन सिंह, उप निदेशक एसएस मिश्रा और सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष कुमार मौजूद रहे।

बैठक में निर्णय लिया गया कि खेल विभाग में तैनात सभी अंशकालिक मानदेय प्रशिक्षकों की प्रातःकाल और सायंकाल स्टेडियम आने-जाने की उपस्थिति रिपोर्ट बायोमेट्रिक पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर खेल निदेशालय को नियमित रूप से भेजी जाएगी।

इसके साथ ही प्रशिक्षकों की उपस्थिति और प्रशिक्षण कार्यों की निगरानी के लिए खेल निदेशालय में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत एक विशेष मॉनिटरिंग डेस्क गठित की जाएगी, जो प्रतिदिन प्रशिक्षकों और प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर प्रशिक्षण से जुड़ी जानकारी एकत्र करेगी।

प्रशिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी के लिए एक गूगल शीट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिसमें प्रशिक्षक का नाम, संबंधित खेल, प्रातःकाल/सायंकाल उपस्थिति समय और प्रशिक्षणार्थियों की संख्या ऑनलाइन फीड की जाएगी।

सचिव, खेल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन प्रशिक्षकों की उपस्थिति की पुष्टि नहीं होगी, उनका आगामी माह का मानदेय रोक दिया जाएगा।

बैठक में प्रशिक्षकों के कार्यों का मूल्यांकन करने के लिए उन्हें तीन श्रेणियों—संतोषजनक, सामान्य और असंतोषजनक—में वर्गीकृत करने का भी निर्णय लिया गया। यह श्रेणीकरण प्रशिक्षक की उपस्थिति, प्रशिक्षित खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार, प्रशिक्षण की गुणवत्ता जैसे बिंदुओं के आधार पर विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा।

निर्णय के अनुसार, जिन प्रशिक्षकों की सेवाएं संतोषजनक पाई जाएंगी उन्हें प्रशंसा दी जाएगी, सामान्य श्रेणी में आने वाले प्रशिक्षकों को सुधार का अवसर दिया जाएगा, जबकि असंतोषजनक पाए जाने पर पुष्टि के बाद संबंधित प्रशिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।

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