सरकार के लिए 'किसान हित सर्वोपरि' : शिवराज चौहान
नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि सरकार के लिए 'किसान हित सर्वोपरि' है और किसी भी प्रतिकूल मौसम परिस्थिति, विशेषकर अल नीनो के प्रभाव से निपटने के लिए केंद्र पूरी तरह…

नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि सरकार के लिए 'किसान हित सर्वोपरि' है और किसी भी प्रतिकूल मौसम परिस्थिति, विशेषकर अल नीनो के प्रभाव से निपटने के लिए केंद्र पूरी तरह तैयार है।
शिवराज चौहान ने आज दिल्ली में कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की एक उच्चस्तरीय वर्चुअली समीक्षा के दौरान यह बात कही।
मंत्री ने कहा, मौसम संबंधी पूर्वानुमान को गंभीरता से लेते हुए सरकार पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है और किसानों को किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयास से संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। वर्ष 2000-2016 के बीच अल नीनो का असर ज्यादा होता था लेकिन आज की उन्नत तकनीक, सूक्ष्म सिंचाई और बेहतर प्रबंधन के कारण हम कृषि उत्पादन में स्थिरता बनाए रखने में सक्षम हैं।"
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल संभावित जोखिम का आकलन करना नहीं बल्कि समय रहते ऐसे सभी कदम उठाना है जिससे किसानों का आत्मविश्वास बना रहे, खेती की निरंतरता प्रभावित न हो और खरीफ सत्र सुचारु रूप से आगे बढ़े।
मंत्री ने भरोसा जताया कि बेहतर जल प्रबंधन, तकनीकी विकास, उन्नत कृषि पद्धतियों और समय पर की गई तैयारियों के बल पर संभावित चुनौतियों का प्रभाव कम किया जा सकेगा और किसानों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग अनुसार, इस वर्ष मानसून सामान्य से कुछ कम (92 प्रतिशत) रहने की संभावना है। इस स्थिति को देखते हुए कृषि मंत्री ने अधिकारियों को कई दिशा-निर्देश दिए। जैसे जल प्रबंधनः देश के जलाशयों में वर्तमान जलस्तर सामान्य से 127 प्रतिशत बेहतर है, जो खरीफ की सिंचाई के लिए राहत की बात है। बीज उपलब्धता: मुख्य और वैकल्पिक फसलों के बीजों की उपलब्धता आवश्यकता से अधिक सुनिश्चित की गई है। इसके लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार है। आकस्मिक योजना: जिला स्तर पर ऐसी योजनाएं सक्रिय की गई हैं जो मानसून में देरी या सूखे की स्थिति में किसानों को 'जलवायु-सहनशील' किस्मों और वैज्ञानिक सलाह से मदद करेंगी।
समीक्षा बैठक के साथ-साथ मंत्री ने उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के किसानों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियां प्रदान की हैं। बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के तहत उत्तर प्रदेश में 20 एलएमटी आलू की खरीद को मंजूरी दी गई है। यह खरीद 6,500.9 रुपये प्रति मीट्रिक टन के मूल्य पर की जाएगी, जिससे किसानों को कम दाम पर फसल बेचने से मुक्ति मिलेगी। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा लगभग 203.15 करोड़ रुपये होगा। आंध्र प्रदेश सरकार के अनुरोध पर मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत चने (बंगाल ग्राम) की खरीद सीमा बढ़ाकर 1,13,250 मीट्रिक टन कर दी गई है। इससे राज्य के दलहन उत्पादकों को लाभकारी मूल्य मिलना सुनिश्चित होगा। कर्नाटक के तूर उत्पादक किसानों को राहत देते हुए एमएसपी पर खरीद की अवधि को 15 मई 2026 तक (30 दिन का विस्तार) बढ़ा दिया गया है। इससे उन किसानों को लाभ होगा जो अब तक अपनी फसल नहीं बेच पाए थे।
कृषि मंत्री ने भरोसा जताया कि राज्यों के साथ निरंतर समन्वय और तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से केंद्र सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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