द इंडियन व्यू

समुद्री प्रदूषण का होगा अंत

दुनिया भर के महासागरों के लिए काल बन चुके प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने में विज्ञान को एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। शोधकर्ताओं के एक दल ने प्रयोगशाला में आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) की मदद से…

Ragwendra P Singh
May 24, 2026
3 min read
समुद्री प्रदूषण का होगा अंत

दुनिया भर के महासागरों के लिए काल बन चुके प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने में विज्ञान को एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। शोधकर्ताओं के एक दल ने प्रयोगशाला में आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) की मदद से एक ऐसे 'सुपर बैक्टीरिया' (Super Bacteria) का विकास किया है, जो समुद्र के खारे पानी में मौजूद सूक्ष्म प्लास्टिक (माइक्रोप्लास्टिक) को अपना भोजन बना लेता है। यह नया जीवाणु प्राकृतिक प्रक्रिया की तुलना में 50 गुना अधिक तेजी से प्लास्टिक को खाकर उसे पर्यावरण के लिए एकदम हानिरहित तत्वों में बदल देता है।

आज हमारी धरती का कोई भी कोना प्लास्टिक प्रदूषण से अछूता नहीं है। विशाल महासागरों से लेकर गहरी समुद्री खाइयों और यहां तक कि इंसानी खून में भी 'माइक्रोप्लास्टिक' (Microplastic) यानी प्लास्टिक के बेहद सूक्ष्म कणों की मौजूदगी ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को गहरी चिंता में डाल दिया था। समुद्री जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को नष्ट कर रहे इस अदृश्य जहर को खत्म करने का अब तक कोई सटीक उपाय नहीं था। लेकिन अब आनुवंशिक विज्ञान (Genetics) ने इस संकट का एक जादुई समाधान खोज निकाला है।

क्या है यह 'सुपर बैक्टीरिया' और यह कैसे बना?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री जीव विज्ञानियों (Marine Biologists) और आनुवंशिकीविदों के एक संयुक्त दल ने एक विशेष प्रकार के समुद्री बैक्टीरिया के डीएनए (DNA) में कृत्रिम रूप से बदलाव किए हैं। इस आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified - GM) बैक्टीरिया को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसका मुख्य भोजन ही प्लास्टिक बन जाए। वैज्ञानिकों ने इस बैक्टीरिया के भीतर ऐसे विशेष एंजाइम (Enzymes) उत्पन्न किए हैं, जो पेट (Polyethylene Terephthalate - PET) और माइक्रोप्लास्टिक के जटिल रासायनिक बंधनों (Chemical Bonds) को आसानी से तोड़ सकते हैं।

50 गुना अधिक तेजी से करता है काम
इस खोज की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात इस बैक्टीरिया की गति है। समुद्र में प्लास्टिक को प्राकृतिक रूप से गलने या नष्ट होने में सैकड़ों से हजारों साल लग जाते हैं। पहले भी कुछ ऐसे जीवाणु खोजे गए थे जो प्लास्टिक खाते थे, लेकिन उनकी गति बहुत धीमी थी। इसके विपरीत, यह नया 'सुपर बैक्टीरिया' समुद्री खारे पानी के अनुकूल (Adaptable) है और यह माइक्रोप्लास्टिक को सामान्य से 50 गुना अधिक तेजी से पचा सकता है।

प्लास्टिक को हानिरहित तत्वों में बदलता है
जब यह सुपर बैक्टीरिया माइक्रोप्लास्टिक को खाता है, तो वह उसे जहरीले रसायनों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल और हानिरहित उपोत्पादों (By-products) में विघटित कर देता है। आसान शब्दों में, यह प्लास्टिक को कार्बन और अन्य जैविक तत्वों में तोड़ देता है, जो समुद्री जल में आसानी से घुल जाते हैं और मछलियों या अन्य समुद्री जीवों (Marine Life) को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
हालांकि यह प्रयोग अभी प्रयोगशाला (Laboratory) के अत्यंत नियंत्रित वातावरण में सफल हुआ है, लेकिन वैज्ञानिक इसे बड़े पैमाने पर समुद्र में उपयोग करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि यह आनुवंशिक रूप से संशोधित बैक्टीरिया खुले समुद्र में जाकर पारिस्थितिकी तंत्र के किसी अन्य हिस्से को नुकसान न पहुंचाए। यदि इसके सुरक्षित व्यावसायिक उपयोग की मंजूरी मिल जाती है, तो यह तकनीक महासागरों को प्लास्टिक के दमघोंटू जाल से मुक्त कराने में सबसे बड़ा हथियार साबित होगी।

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