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भारत में फिर लौटनी चाहिए फॉर्मूला-वन रेस, मिका हाकिनेन ने की पुरजोर पैरवी

फॉर्मूला-वन के दो बार के विश्व चैंपियन मिका हाकिनेन ने भारत में इस प्रतिष्ठित मोटरस्पोर्ट की वापसी की पुरजोर वकालत करते हुए कहा है कि देश में प्रशंसकों की बड़ी संख्या और व्यापक कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए यहां फिर…

Ragwendra P Singh
October 18, 2026
4 min read
भारत में फिर लौटनी चाहिए फॉर्मूला-वन रेस, मिका हाकिनेन ने की पुरजोर पैरवी

फॉर्मूला-वन के दो बार के विश्व चैंपियन मिका हाकिनेन ने भारत में इस प्रतिष्ठित मोटरस्पोर्ट की वापसी की पुरजोर वकालत करते हुए कहा है कि देश में प्रशंसकों की बड़ी संख्या और व्यापक कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए यहां फिर से रेस का आयोजन किया जाना चाहिए।

उनका मानना है कि फॉर्मूला-वन की वापसी केवल खेल के लिहाज से ही नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए नेटवर्किंग, कारोबार के विस्तार और व्यावसायिक संबंध मजबूत करने के लिहाज से भी फायदेमंद साबित हो सकती है। भारत सरकार ने भी देश में इस मोटरस्पोर्ट की वापसी के लिए प्रयास शुरू किए हैं।

भारत में 2011 से 2013 तक लगातार तीन वर्षों तक फॉर्मूला-वन रेस का आयोजन किया गया था। इन तीनों वर्षों में जर्मनी के सेबेस्टियन वेटल ने रेड बुल की ओर से प्रतिस्पर्धा करते हुए विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीता था। हालांकि, इसके बाद भारत में इस रेस का आयोजन बंद हो गया।

साभार : गूगल

फैनकोड की ओर से आयोजित विशेष साक्षात्कार में एक समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए हाकिनेन ने कहा कि भारत आने के बाद उन्हें यहां फॉर्मूला-वन के प्रशंसकों की संख्या और इस खेल की लोकप्रियता का बेहतर अंदाजा हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में कई साल पहले रेस का आयोजन हुआ था और मैंने सुना है कि इसे लेकर चर्चा चल रही है। यहां आने के बाद मैंने महसूस किया कि भारत में फॉर्मूला-वन के प्रशंसकों की संख्या बड़ी है।’’

हाकिनेन ने भारत में फॉर्मूला-वन की वापसी को जरूरी बताते हुए कहा कि देश का इस खेल से पुराना जुड़ाव और भारतीय ड्राइवरों की मौजूदगी भी यहां दोबारा रेस आयोजित करने के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि फॉर्मूला-वन भारत में होना चाहिए। इसे यहां वापस आना ही चाहिए। भारत के इतिहास में दो ड्राइवर फॉर्मूला-वन में भाग ले चुके हैं। इससे भी भारत में रेस आयोजित करने की जरूरत और मजबूत होती है।''

फॉर्मूला-वन की वापसी के पक्ष में अपनी दलील को आगे बढ़ाते हुए हाकिनेन ने इसके व्यावसायिक पहलुओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन से कंपनियों को भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने, नए कारोबारी संपर्क स्थापित करने और व्यावसायिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

उन्होंने कहा, ''यह कंपनियों के लिए भारत आकर नेटवर्क बनाने, कारोबार शुरू करने और आपसी व्यावसायिक संबंध मजबूत करने का शानदार अवसर है। यह केवल प्रचार का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे व्यापक कारोबारी संभावनाएं जुड़ी हैं। इसलिए मेरा कहना है कि इसे शुरू कीजिए।''

भारत में फॉर्मूला-वन की वापसी की वकालत करने के साथ ही हाकिनेन ने मौजूदा सत्र में रेड बुल और उसके स्टार ड्राइवर मैक्स वेरस्टापेन के प्रदर्शन की भी सराहना की। माइकल शूमाकर के दौर में विश्व चैंपियन बने हाकिनेन ने कहा कि रेड बुल ने सत्र के दौरान अपनी स्थिति सुधारने और कार के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए उल्लेखनीय काम किया है।

दो बार के विश्व चैंपियन ने कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि सत्र की शुरुआत के मुकाबले मैक्स अब ज्यादा खुश होंगे। मैं इस बात से प्रभावित हूं कि रेड बुल की टीम ने इतने कम समय में अपने प्रदर्शन और कार के विकास में इतना सुधार कैसे किया। मैक्स एक शानदार ड्राइवर हैं।’’

हाकिनेन ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी ड्राइवर की व्यक्तिगत प्रतिभा के साथ प्रतिस्पर्धी कार का होना भी सफलता के लिए बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, ड्राइवर और टीम के बीच बेहतर तालमेल ही बड़े परिणाम हासिल करने में अहम भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा, ''आप कितने भी अच्छे ड्राइवर क्यों न हों, अगर आपके पास सही कार नहीं है तो आप सफल नहीं हो सकते। मैक्स और उनकी टीम ने मिलकर शानदार काम किया है और टीम को मौजूदा स्थिति तक पहुंचाया।''

वहीं, फेरारी टीम के भीतर चल रही चर्चाओं पर हाकिनेन ने ज्यादा विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने लुईस हैमिल्टन की ड्राइविंग क्षमता और फेरारी की ऐतिहासिक विरासत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि हैमिल्टन और चार्ल्स लेक्लेर के काम करने का तरीका दिलचस्प है, लेकिन टीम से जुड़ी चर्चाओं को लेकर वह कुछ हैरान भी हैं।

हाकिनेन ने कहा, ''लुईस और चार्ल्स लेक्लेर जिस तरह काम कर रहे हैं, वह दिलचस्प है। फिलहाल काफी बातें हो रही हैं। मैं फिनलैंड से हूं और मेरा मानना है कि कम बोलना और ज्यादा काम करना बेहतर है। इस मामले में मैं थोड़ा हैरान हूं।''

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