महाराष्ट्र में भारतनेट का विस्तार, 28,237 ग्राम पंचायतों को मिलेगा ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का लाभ
मुंबई ( इंडियन व्यू टीम) : ग्रामीण महाराष्ट्र में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन), दूरसंचार विभाग, महाराष्ट्र सरकार, महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड…

मुंबई ( इंडियन व्यू टीम) : ग्रामीण महाराष्ट्र में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन), दूरसंचार विभाग, महाराष्ट्र सरकार, महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमडीआईएल), बीएसएनएल और महाआईटी के बीच संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) को लागू करने के लिए समझौता हुआ है। कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र को ₹10,520 करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की है। इसके तहत 28,237 ग्राम पंचायतों को कवर किया जाएगा और 15,799 गांवों में मांग के आधार पर अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्रामीण डिजिटल ढांचे को मिलेगा विस्तार
नई दिल्ली स्थित संचार भवन में हुए समझौते का उद्देश्य महाराष्ट्र के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में टेलीकॉम अवसंरचना को मजबूत और अपग्रेड करना है। इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में तेज और विश्वसनीय ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के साथ डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
छह संस्थाओं के बीच हुआ समझौता
यह समझौता डिजिटल भारत निधि (डीबीएन), दूरसंचार विभाग, महाराष्ट्र सरकार, महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमडीआईएल), भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महाराष्ट्र इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महाआईटी) के बीच हुआ है। समझौते के दौरान डीबीएन के प्रशासक श्यामल मिश्रा, महाराष्ट्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
28,237 ग्राम पंचायतों को किया जाएगा कवर
महाराष्ट्र में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के जरिए लागू किया जाएगा। इसके तहत कुल 28,237 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। नेटवर्क को ज्यादा मजबूत बनाने के लिए पहले चरण की 15,171 ग्राम पंचायतों को लीनियर टोपोलॉजी से रिंग टोपोलॉजी में अपग्रेड किया जाएगा।
दूसरे चरण और नई ग्राम पंचायतें भी शामिल
कार्यक्रम के तहत दूसरे चरण की 12,740 ग्राम पंचायतों को भी कवर किया जाएगा। इसके अलावा हाल में गठित 326 ग्राम पंचायतों को भी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस तरह मौजूदा नेटवर्क को अपग्रेड करने के साथ नए क्षेत्रों तक भी भारतनेट की पहुंच बढ़ाई जाएगी।
15,799 गांवों में मांग आधारित कनेक्टिविटी
अंतिम छोर तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए 15,799 गांवों को मांग के आधार पर कनेक्टिविटी दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट आधारित सरकारी और निजी सेवाओं की पहुंच को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
₹10,520 करोड़ की वित्तीय सहायता
भारत सरकार ने महाराष्ट्र में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए ₹10,520 करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की है। इस सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में नौ लाख से अधिक घरों तक फाइबर कनेक्शन पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ई-गवर्नेंस और टेलीमेडिसिन को मिलेगा लाभ
बेहतर ब्रॉडबैंड नेटवर्क से ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और नागरिक सेवाओं की डिलीवरी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे डिजिटल सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने के साथ ग्रामीण आबादी की डिजिटल भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी थी मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य मौजूदा भारतनेट नेटवर्क को अपग्रेड, एकीकृत और विस्तारित करना है, ताकि ग्राम पंचायतों और गांवों को मांग के आधार पर मजबूत और भविष्य के लिए तैयार ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जा सके।
डिजिटल भारत निधि की भूमिका
डिजिटल भारत निधि, जिसे पहले यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) के नाम से जाना जाता था, दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत डीबीएन के रूप में संचालित है। इसका उद्देश्य कम सुविधा वाले ग्रामीण, दूर-दराज और अन्य क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं की पहुंच और डिलीवरी को बढ़ावा देना है। भारतनेट के अलावा डीबीएन के तहत 4जी सैचुरेशन, आकांक्षी जिलों के ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल सेवाएं, जहां अभी कनेक्टिविटी नहीं है, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों, हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों, द्वीपों तथा पूर्वोत्तर क्षेत्रों में मोबाइल सेवाओं से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं।
डिजिटल रूप से सशक्त महाराष्ट्र की दिशा में कदम
महाराष्ट्र में समझौते के साथ संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तेजी से क्रियान्वयन का रास्ता साफ हुआ है। व्यापक फाइबर नेटवर्क और मांग आधारित कनेक्टिविटी के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
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