द इंडियन व्यू

भारतीय रेलवे का ग्रीन एनर्जी की ओर ऐतिहासिक कदम: देश में जल्द दौड़ेगी पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन, प्रदूषण होगा जीरो

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railways) जल्द ही परिवहन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रहा है। कार्बन उत्सर्जन को कम करने और 'हरित ऊर्जा' (Green Energy) को बढ़ावा देने की दिशा में…

Ragwendra P Singh
July 13, 2026
2 min read
भारतीय रेलवे का ग्रीन एनर्जी की ओर ऐतिहासिक कदम: देश में जल्द दौड़ेगी पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन, प्रदूषण होगा जीरो

अभिषेक सिंह/  नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railways) जल्द ही परिवहन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रहा है। कार्बन उत्सर्जन को कम करने और 'हरित ऊर्जा' (Green Energy) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़े कदम के तहत, भारत जल्द ही अपनी पहली स्वदेशी रूप से विकसित 'हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन' (Hydrogen-powered Train) लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। रेलवे बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, इस ट्रेन के सभी तकनीकी परीक्षण (Trials) लगभग पूरे हो चुके हैं और इसे जल्द ही देश के ऐतिहासिक हेरिटेज रूट्स पर व्यावसायिक रूप से शुरू किया जाएगा।

क्या है हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत?


वर्तमान में देश में ट्रेनें या तो डीजल से चलती हैं या बिजली (इलेक्ट्रिक) से। लेकिन यह नई ट्रेन पारंपरिक ईंधन के बजाय 'हाइड्रोजन फ्यूल सेल' (Hydrogen Fuel Cells) तकनीक पर काम करेगी।
* जीरो एमिशन: इस ट्रेन से धुएं या हानिकारक गैसों का कोई उत्सर्जन नहीं होगा। यह फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली पैदा करेगी और धुएं की जगह केवल भाप (Water Vapor) और पानी बाहर छोड़ेगी।
* रफ्तार और क्षमता: यह ट्रेन 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी और एक बार हाइड्रोजन भरवाने पर यह लगभग 1000 किलोमीटर तक का सफर आसानी से तय कर लेगी।

किन रूट्स पर चलेगी?


रेलवे मंत्रालय ने प्रारंभिक चरण में इन 'वंदे मेट्रो' (हाइड्रोजन) ट्रेनों को देश के प्रमुख हेरिटेज और पहाड़ी मार्गों पर चलाने की योजना बनाई है। इनमें कालका-शिमला, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, कांगड़ा वैली और नीलगिरी माउंटेन रेलवे जैसे पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील मार्ग शामिल हैं।

आत्मनिर्भर भारत की मिसाल


अभी तक दुनिया में केवल जर्मनी और चीन ने ही हाइड्रोजन ट्रेनें सफलतापूर्वक चलाई हैं। भारत का यह कदम न केवल 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करेगा, बल्कि भारतीय रेलवे को 2030 तक 'नेट जीरो कार्बन एमिटर' (Net Zero Carbon Emitter) बनाने के महात्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में भी एक गेम चेंजर साबित होगा।

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