ब्रह्मांड में जीवन की तलाश
वाशिंगटन (साइंस डेस्क): क्या इस अनंत ब्रह्मांड में हम अकेले हैं? यह एक ऐसा सवाल है जिसने सदियों से इंसानों और वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर किया है। लेकिन अब, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक और…

वाशिंगटन (साइंस डेस्क): क्या इस अनंत ब्रह्मांड में हम अकेले हैं? यह एक ऐसा सवाल है जिसने सदियों से इंसानों और वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर किया है। लेकिन अब, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक और युगांतरकारी खोज हुई है जो इस सवाल का जवाब हमेशा के लिए बदल सकती है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के सबसे उन्नत और शक्तिशाली 'जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप' (JWST) ने हमारे सौरमंडल से बहुत दूर एक ऐसे 'एक्सोप्लैनेट' (Exoplanet) यानी बाह्य ग्रह की खोज की है, जिसे दुनिया भर के खगोलविद 'दूसरी पृथ्वी' (Earth 2.0) का दर्जा दे रहे हैं। सबसे सनसनीखेज बात यह है कि इस ग्रह के वायुमंडल में न केवल पानी की मौजूदगी के साक्ष्य मिले हैं, बल्कि ऐसे रासायनिक संकेत भी प्राप्त हुए हैं जो सीधे तौर पर वहां जीवन (Alien Life) होने की ओर इशारा करते हैं।
'गोल्डीलॉक्स ज़ोन' में स्थित है यह रहस्यमयी ग्रह
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह नया खोजा गया ग्रह अपने मातृ तारे (Host Star) से बिल्कुल उसी सटीक दूरी पर परिक्रमा कर रहा है, जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में 'हैबिटेबल ज़ोन' या 'गोल्डीलॉक्स ज़ोन' (Goldilocks Zone) कहा जाता है। इस क्षेत्र की खासियत यह होती है कि यहां का तापमान न तो उबलते पानी जितना गर्म होता है और न ही बर्फ जितना ठंडा। इसी कारण से इस ग्रह की सतह पर पानी के तरल अवस्था (Liquid Water) में मौजूद होने की पूरी संभावना है। शुरुआती आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि इस ग्रह का आकार हमारी पृथ्वी से लगभग 1.5 गुना बड़ा है और इसकी सतह गैस के बजाय चट्टानी (Rocky) होने के मजबूत संकेत मिले हैं।
वायुमंडल में मिले मीथेन और जीवन के रासायनिक हस्ताक्षर
जेम्स वेब टेलिस्कोप ने 'इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी' (Infrared Spectroscopy) तकनीक का उपयोग करके इस ग्रह के वायुमंडल को चीरकर आने वाली रोशनी का बेहद बारीकी से विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण के नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं। वैज्ञानिकों को वहां के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैसों का एक ऐसा संतुलन मिला है, जो जीवन के पनपने के लिए बेहद अनुकूल है।
लेकिन जिस चीज ने विज्ञान जगत में सबसे बड़ा तहलका मचाया है, वह है वहां 'डाइमिथाइल सल्फाइड' (Dimethyl Sulfide - DMS) नामक एक विशेष अणु के संभावित संकेत मिलना। पृथ्वी पर यह DMS अणु प्राकृतिक रूप से केवल और केवल जीवित जीवों द्वारा ही उत्सर्जित किया जाता है (विशेषकर समुद्र में पाए जाने वाले फाइटोप्लांकटन द्वारा)। यदि इस ग्रह पर इस अणु की पूरी तरह पुष्टि हो जाती है, तो यह इस बात का अकाट्य प्रमाण होगा कि वहां सूक्ष्मजीवों (Microbes) के रूप में ही सही, लेकिन जीवन जरूर पनप रहा है।
अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग की शुरुआत
इस अभूतपूर्व खोज ने अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा को एक नया आयाम दे दिया है। अब तक वैज्ञानिक केवल ऐसे ग्रहों की तलाश कर रहे थे जहां जीवन पनपने की 'संभावना' हो, लेकिन यह पहली बार है जब जीवन के इतने मजबूत रासायनिक साक्ष्य किसी दूसरे ग्रह पर मिले हैं। नासा के वैज्ञानिक अब इस ग्रह पर और अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। आने वाले कुछ महीनों में जेम्स वेब टेलिस्कोप इस ग्रह की सतह और इसके बादलों का और अधिक गहराई से अध्ययन करेगा ताकि इन रसायनों की शत-प्रतिशत पुष्टि की जा सके।
अगर भविष्य के अवलोकनों में इन जीवन-संकेतों की अंतिम पुष्टि हो जाती है, तो यह मानव इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी खोज मानी जाएगी। यह खोज हमें यह एहसास दिलाती है कि यह ब्रह्मांड कितना विशाल है और हम इसके केवल एक छोटे से हिस्से में रहते हैं। विज्ञान और खगोलशास्त्र के प्रेमियों के लिए यह समय बेहद रोमांचक है, क्योंकि हम शायद 'एलियन' जीवन की खोज के सबसे करीब खड़े हैं।
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