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गृह मंत्रालय ने AI डीपफेक फ्रॉड के खतरे की चेतावनी दी, सिम स्वैप धोखाधड़ी से बचने को कहा

नई दिल्ली ( पल्लवी श्रीवास्तव): गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने वित्तीय सुरक्षा प्रणालियों को दरकिनार करने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित डीपफेक धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे…

Ragwendra P Singh
June 12, 2026
2 min read
गृह मंत्रालय ने AI डीपफेक फ्रॉड के खतरे की चेतावनी दी, सिम स्वैप धोखाधड़ी से बचने को कहा

नई दिल्ली ( पल्लवी श्रीवास्तव): गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने वित्तीय सुरक्षा प्रणालियों को दरकिनार करने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित डीपफेक धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे के बारे में नागरिकों, बैंकों और फिनटेक कंपनियों को चेतावनी देते हुए एक नई एडवाइजरी जारी की है। जारी की गई एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि साइबर अपराधी असली जैसे डीपफेक वीडियो और सिंथेटिक पहचान बनाने के लिए एआई टूल्स का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं, जो चेहरे के ऑथेंटिकेशन, लाइवनेस वेरिफिकेशन, वीडियो-KYC प्रक्रिया, अकाउंट रिकवरी मैकेनिज्म और दूसरे डिजिटल सिक्योरिटी उपायों को हरा सकते हैं।

क्या कहती है एडवाइजरी :

एडवाइजरी के मुताबिक, धोखेबाज अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग एप्लिकेशन, जॉब पोर्टल, डेटिंग वेबसाइट या फोन कॉल के जरिए संभावित शिकार से संपर्क करके शुरुआत करते हैं फिर वे लोगों को वीडियो इंटरैक्शन में शामिल होने के लिए धोखा दे सकते हैं, जहां पलकें झपकाना, बोलना, सिर घुमाना या स्क्रीन पर देखना जैसी चेहरे की हरकतें उनकी जानकारी के बिना रिकॉर्ड की जाती हैं।

इन रिकॉर्डिंग को बाद में एडवांस्ड AI टूल्स का इस्तेमाल करके प्रक्रिया किया जा सकता है ताकि बहुत असली जैसे डिजिटल रेप्लिका बनाए जा सकें जो किसी व्यक्ति के चेहरे के भाव, आंखों की हरकतों और यहां तक कि आवाज के पैटर्न की नकल करते हैं। ऐसे सिंथेटिक मीडिया का इस्तेमाल फिर चेहरे का प्रमाणीकरण (Facial Authentication) और लाइवनेस डिटेक्शन सिस्टम को दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है, जहां डीपफेक डिटेक्शन (पता लगाना) के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय नहीं हैं।

गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी कि सफल प्रमाणीकरण को दरकिनार करने से क्रिमिनल फ्रॉड करके नो योर कस्टमर (KYC) प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं, डिजिटल वॉलेट एक्टिवेट कर सकते हैं, वित्तीय अकाउंट खोल सकते हैं, या मौजूदा अकाउंट और डिजिटल सर्विस तक बिना इजाजत के पहुंच पा सकते हैं। इस उभरते खतरे की गंभीरता को बताते हुए, एडवाइजरी में वित्तीय संस्थान और फिनटेक कंपनियों से उन्नत डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट डिटेक्शन तकनीक को एकीकृत करके कस्टमर ऑनबोर्डिंग सिस्टम को मजबूत करने की अपील की गई।

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