केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को दी मंजूरी
नई दिल्ली ( पल्लवी श्रीवास्तव) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है। इससे इस क्षेत्र में…

नई दिल्ली ( पल्लवी श्रीवास्तव) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है। इससे इस क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को और मजबूती मिलेगी।
इस योजना की मुख्य बातें/प्रमुख विशेषताएं:
- उत्पादन और घरेलू मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने, आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए, सरकार ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है।
- एमपीएमएस योजना का उद्देश्य प्रौद्योगिकीय संप्रभुता हासिल करने, बड़े आर्थिक मूल्य प्राप्त करने और डिजाइन तथा अनुसंधान एवं विकास में भारतीय पेटेंट बनाने के लिए स्वदेशी ब्रांडों का निर्माण करना है।
- इस योजना की अवधि 5 वर्ष अर्थात् वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक है।
- इस योजना के तहत देश में मोबाइल फोन के विनिर्माण के लिए पात्र बिक्री पर 2.25 से 5 प्रतिशत तक की अलग-अलग दरों पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
- योजना में प्रमुख कंपोनेंट/सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग से जुड़ा 1.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी शामिल है।
- भारतीय ब्रांड बनाने के लिए, उत्पाद के डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के लिए पात्र बिक्री पर 3 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' विजन ने वित्त वर्ष 2014-15 से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को 7 गुना और निर्यात को 11 गुना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र विशेष रूप से दूरदराज के गांवों के युवा पुरुषों और महिलाओं के लिए, एक प्रमुख रोजगार स्रोत के रूप में उभरा है, जहां कुछ संयंत्र एक ही स्थान पर 5,000 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार प्रदान करते हैं।
मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में वृद्धि का प्रमुख वाहक रहा है और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम का आधार बन गया है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता है, और देश में प्रयुक्त 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन का विनिर्माण स्वदेशी रूप से किया जा रहा है।
वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत से निर्यात होने वाले सबसे बड़े उत्पाद वर्ग के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने डीजल ईंधन और कट हीरे आदि पारंपरिक प्रमुख निर्यात वस्तुओं को पीछे छोड़ दिया है। मोबाइल फोन अब भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात का एक बड़ा हिस्सा हैं और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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