अमेरिका में G20 की 'फैमिली फोटो' रद्द: यूरोपीय देशों ने लावरोव के साथ फोटो खिंचवाने से किया इनकार, रूबियो ने हटाया एजेंडा

विवेक ओझा
अटलांटा: अमेरिका के अटलांटा शहर में चल रही G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में एक बड़ा कूटनीतिक विवाद सामने आया है। मेजबान अमेरिका ने पारंपरिक 'फैमिली फोटो' को रद्द कर दिया है, क्योंकि यूरोपीय देशों और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ एक ही फ्रेम में आने से साफ इनकार कर दिया था। यह घटना वैश्विक कूटनीति में गहरे मतभेदों को उजागर करती है।
क्यों रद्द हुई फोटो?
अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, 'फैमिली फोटो' को आधिकारिक एजेंडे से इसलिए हटाया गया, ताकि यह किसी 'तमाशे' या ध्यान भटकाने वाला विषय न बन जाए। दरअसल, बैठक में शामिल लगभग एक-तिहाई देशों ने स्पष्ट कर दिया था कि वे रूस के किसी भी प्रतिनिधि के साथ फोटो नहीं खिंचवाएंगे। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने कहा था, "यूरोपीय साझेदारों और श्री लावरोव के साथ कोई फैमिली फोटो किसी भी हालत में नहीं होगी, क्योंकि रूस के साथ कोई सामान्यता नहीं है।"
किन देशों ने किया विरोध?
ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय संघ के कई देशों ने रूस के साथ फोटो खिंचवाने से इनकार कर दिया। ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से ब्रिटेन की रूसी मंत्रियों के साथ सीधे द्विपक्षीय संबंध न रखने की लंबी नीति रही है। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के प्रवक्ता ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने रूस के 'अवैध और क्रूर आक्रमण' को सामान्य नहीं बनाया है।
अमेरिका-रूस संबंधों में नरमी का असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रूस के खिलाफ कुछ प्रतिबंधों को हटाया है और रूसी डीजल खरीदने का समझौता किया है। यूरोपीय देशों ने वाशिंगटन के इस रुख की आलोचना की है। जर्मन विदेश मंत्री ने कहा कि रूस के साथ कोई सामान्य संबंध नहीं हो सकता, जब तक कि यूक्रेन में युद्ध खत्म नहीं होता।
आगे की चुनौतियां
G20 विदेश मंत्रियों की यह बैठक शुक्रवार (30 अक्टूबर) से शुरू हुई है और शनिवार को खत्म होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव, अमेरिकी टैरिफ और दक्षिण चीन सागर जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेदों के कारण इस बैठक में कोई संयुक्त बयान जारी होना मुश्किल है।
सम्बंधित ख़बरें
पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान पर बलूच की ड्रोन यूनिट ने बोला हमला, जानमाल का हुआ बड़ा नुकसान
बीआरजी का यह कदम बलूचिस्तान में ड्रोन युद्ध को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। इससे पहले बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने भी इस साल फरवरी में 'कहर' (QAHR) नाम से अपनी ड्रोन यूनिट का गठन किया था और कई सैन्य ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है। पिछले कुछ महीनों में बलूच विद्रोहियों द्वारा पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर ड्रोन और मोर्टार हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं, जिससे पाकिस्तानी सेना की चुनौतियां और बढ़ गई हैं।
