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Maharashtra Politics: आज हो सकता है CM के नाम पर फैसला, फडणवीस को फिर मिल सकता है मौका

बीएस राय: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद महायुति को प्रचंड बहुमत मिला है। भाजपा, शिवसेना और एनसीपी ने 230 सीटें जीतीं, जबकि एमवीए सिर्फ 46 सीटों पर सिमट गई। अब महायुति ने सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें विधायकों की अलग-अलग बैठकें होंगी और सीएम चयन पर फैसला लिया जाएगा।

हालांकि सूत्रों की माने तो बीजेपी, शिंदे के बीच बातचीत लगभग तय हो गई है। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीजेपी और शिंदे के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि दोनों को ढाई ढाई साल मौका मिलेगा। इस बार पहले बीजेपी की तरफ से दवेंद्र फडणवीस सीएम बनाए जा सकते हैँ और वह ढाई साल रहेंगे उसके बाद एकनाथ शिंदे को सीएम बनाया जाएगा।

महाराष्ट्र की जनता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को प्रचंड बहुमत देकर सत्ता सौंप दी है। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव के नतीजे स्पष्ट रूप से महायुति के पक्ष में गए हैं। 288 सीटों वाली विधानसभा में 230 सीटों पर कब्जा कर महायुति ने अपना दबदबा दिखाया है। इस अभूतपूर्व जीत के बाद अब महाराष्ट्र में नई सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

सीएम पद पर होगा फैसला चुनाव नतीजों के बाद महायुति की अगली चुनौती मुख्यमंत्री पद पर आम सहमति बनाना है। इसके लिए महायुति में शामिल भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के विधायकों की अलग-अलग बैठकें होने जा रही हैं। इन बैठकों में विधायक दल के नेताओं का चयन किया जाएगा।

माना जा रहा है कि सभी दलों के विधायकों की संयुक्त बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाएगी। शिवसेना की हाल ही में हुई ऑनलाइन बैठक में पार्टी ने फैसला लेने का पूरा अधिकार मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को दे दिया है। वहीं भाजपा और एनसीपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी मंथन चल रहा है। मुंबई में विधायकों की सक्रियता बढ़ी महायुति के सभी विधायकों को मुंबई पहुंचने का निर्देश दिया गया है।

मुंबई में एक बड़ी बैठक होगी, जिसमें विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इसके अलावा भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के विधायकों की भी अलग-अलग बैठकें होंगी। इन बैठकों के बाद महायुति के तीनों प्रमुख नेताओं की भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ बैठक होगी, जिसमें मुख्यमंत्री पद पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

इस चुनाव में विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) की ताकत 46 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को सिर्फ 16 सीटें मिलीं, जबकि शिवसेना (उद्धव गुट) को 20 सीटें मिलीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) को सिर्फ 10 सीटों से संतोष करना पड़ा।

इस बार के चुनाव नतीजों ने महायुति को अभूतपूर्व बढ़त दिलाई है। भाजपा ने 132 सीटें जीतकर गठबंधन में अपनी प्रमुख भूमिका को और मजबूत किया। शिवसेना (शिंदे गुट) ने 57 सीटें जीतीं और एनसीपी (अजित पवार गुट) ने 41 सीटें जीतीं। इन नतीजों से साफ है कि महाराष्ट्र की जनता ने महायुति के विकास और स्थिरता के वादों पर भरोसा जताया है।

अब सबकी निगाहें महायुति की बैठकों और मुख्यमंत्री पद पर फैसले पर टिकी हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में इस बड़ी जीत के बाद सरकार से जनता की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में महायुति के लिए चुनावी वादों को प्रभावी ढंग से पूरा करना एक चुनौती होगी। महाराष्ट्र में इस नई सरकार के गठन से राज्य में विकास और स्थिरता के एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है।

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