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अमरीका और सऊदी अरब ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : अमरीका और सऊदी अरब ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे खाड़ी देश सऊदी अरब को नागरिक परमाणु कार्यक्रम विकसित करने की अनुमति मिल जाएगी। अमरीकी ऊर्जा विभाग के अनुसार, इस समझौते को शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौता बताया गया है, जिससे सऊदी अरब के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में अमरीकी कंपनियों को व्यापक पहुंच मिलेगी।

अब इस समझौते को समीक्षा के लिए अमरीकी संसद में भेजा जाएगा। हालांकि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी वर्तमान में संसद के ऊपरी और निचले दोनों सदनों पर नियंत्रण रखती है, फिर भी दोनों पक्षों के कुछ सांसद इस समझौते का विरोध कर सकते है।

समझौते का लिखित प्रारूप सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन अमरीकी मीडिया ने बताया है कि इससे सऊदी अरब को भविष्य में यूरेनियम संवर्धन करने की अनुमति मिल सकती है, जिसका उपयोग बिजली संयंत्रों के ईंधन के रूप में और परमाणु बम बनाने में भी किया जा सकता है। अमरीकी ऊर्जा विभाग ने बताया कि सहयोग समझौते के साथ-साथ एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौतें पर भी हस्ताक्षर हुए है।

सऊदी सरकार ने भी एक बयान जारी कर कहा कि यह समझौता ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच मौजूदा सहयोग का विस्तार है। यह समझौता सऊदी नेता की पिछले नवंबर में वाशिंगटन यात्रा के बाद हुआ है।

यह घोषणा अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच आई है। सऊदी अरब लंबे समय से अमरीका का सहयोगी रहा है और कई अमरीकी सैन्य अड्डों की मेजबानी करता है, जिन पर ईरानी हमले हुए हैं। इससे दो दिन पहले ही यमन में ईरान के सहयोगी संगठन हौथी ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी।

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