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आगामी विधानसभा चुनाव: चुनाव आयोग सख्त, महाराष्ट्र और झारखंड को लंबित तबादले तुरंत पूरे करने के निर्देश

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) ने महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में इस साल के अंत में होने वाले अहम विधानसभा चुनावों के लिए अपनी प्रशासनिक तैयारियों को तेज कर दिया है। स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव (Free and Fair Elections) संपन्न कराने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड के मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) और पुलिस महानिदेशकों (DGPs) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव से पहले पुलिस और प्रशासन के उन सभी अधिकारियों के लंबित तबादले (Transfers) तत्काल प्रभाव से पूरे किए जाएं, जो निर्धारित मानदंडों के दायरे में आते हैं।

चुनाव आयोग का ‘ट्रांसफर मानदंड’ क्या है?

चुनाव आयोग की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, किसी भी राज्य में चुनाव से पहले प्रशासनिक तटस्थता (Administrative Neutrality) सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इसके तहत नियम है कि:

  • 1. कोई भी अधिकारी (विशेषकर जिलाधिकारी, एसपी, रिटर्निंग ऑफिसर या पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी) अपने ‘गृह जिले’ (Home District) में तैनात नहीं रह सकता।
  • 2. जो अधिकारी पिछले 4 वर्षों में से 3 वर्ष एक ही स्थान पर या एक ही पद पर पूरे कर चुके हैं, उनका वहां से तबादला होना अनिवार्य है।

लंबित मामलों पर आयोग की नाराजगी

आयोग के संज्ञान में आया था कि महाराष्ट्र और झारखंड में कई ऐसे अधिकारी अब भी अहम पदों पर जमे हुए हैं, जो इन मानदंडों को पूरा करते हैं और जिनका तबादला अब तक हो जाना चाहिए था। चुनाव आयोग ने दोनों राज्यों के प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित विभागों को एक तय समय-सीमा के भीतर ‘कंप्लायंस रिपोर्ट’ (अनुपालन रिपोर्ट) सीधे दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

लेवल प्लेइंग फील्ड सुनिश्चित करना है लक्ष्य

यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि सत्ताधारी दल चुनाव के दौरान स्थानीय प्रशासन या पुलिस का अनुचित लाभ न उठा सके। अधिकारियों का समय पर फेरबदल ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ (Level Playing Field) तैयार करता है, जिससे सभी राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार में समान अवसर मिलते हैं। चुनाव आयोग की इस सख्ती से स्पष्ट है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक ढिलाई के मूड में नहीं है।

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