चुनाव सुधारों की दिशा में बड़ा कदम: कानून मंत्रालय ने स्वीकारी विधि आयोग की रिपोर्ट, मानसून सत्र में होगी पेश

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र और उसकी चुनाव प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने 22वें विधि आयोग (Law Commission of India) द्वारा चुनाव सुधारों (Electoral Reforms) पर तैयार की गई बहुप्रतीक्षित और विस्तृत रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सरकार इस रिपोर्ट को आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखने की पूरी तैयारी कर रही है।
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें
लंबे समय से कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों को इस रिपोर्ट का इंतजार था। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट में कई ऐसे क्रांतिकारी बदलावों की सिफारिश की गई है, जो भारत की चुनाव प्रक्रिया की दिशा बदल सकते हैं।
- 1. एक देश, एक चुनाव (One Nation, One Election): रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की संवैधानिक व्यवहार्यता से जुड़ा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए संविधान में कौन-कौन से संशोधन करने होंगे और त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति से कैसे निपटा जाएगा।
- 2. चुनाव फंडिंग में पारदर्शिता: इलेक्टोरल बांड (Electoral Bonds) के रद्द होने के बाद, राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए एक नए और सुदृढ़ तंत्र का प्रस्ताव दिया गया है।
- 3. चुनाव आयोग की स्वायत्तता: भारत के चुनाव आयोग (ECI) को अधिक शक्तियां देने और चुनावी खर्च की सीमा (Election Expenditure Limit) को अधिक तर्कसंगत बनाने पर जोर दिया गया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव
विधि आयोग की इस रिपोर्ट के पटल पर रखे जाने के बाद देश में एक नई राजनीतिक बहस छिड़ने की उम्मीद है। ‘एक देश, एक चुनाव’ का विचार प्रधानमंत्री के विजन का अहम हिस्सा रहा है। यदि इन सिफारिशों को कानूनी जामा पहनाया जाता है, तो यह आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा चुनाव सुधार होगा। सरकार की मंशा है कि इस रिपोर्ट पर संसद के भीतर और बाहर एक स्वस्थ बहस हो, ताकि लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक मजबूत किया जा सके।



