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भारत की ‘क्वांटम’ छलांग: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे के IITs में स्थापित होंगी देश की पहली 4 अत्याधुनिक क्वांटम लैब्स

अभिषेक सिंह/  नई दिल्ली: विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर और विश्व गुरु बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाल ही में कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए 6,000 करोड़ रुपये के ‘राष्ट्रीय क्वांटम मिशन’ (National Quantum Mission – NQM) के तहत, सरकार ने देश की पहली चार अत्याधुनिक ‘क्वांटम कंप्यूटिंग लैब्स’ और ‘थिमैटिक हब’ (T-Hubs) स्थापित करने के स्थानों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। ये विश्व स्तरीय लैब्स देश के चार शीर्ष तकनीकी संस्थानों—आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मुंबई, आईआईएससी बेंगलुरु और आईआईटी पुणे—के परिसरों में स्थापित की जाएंगी।

क्या होगा इन 4 हब्स में खास?

क्वांटम तकनीक भविष्य की तकनीक है, जो आज के सबसे तेज सुपरकंप्यूटर को भी पीछे छोड़ सकती है। इन चारों संस्थानों को अलग-अलग विशेष जिम्मेदारियां (Domains) सौंपी गई हैं:
1. आईआईएससी बेंगलुरु (IISc Bengaluru): यहां का फोकस ‘क्वांटम कंप्यूटिंग हार्डवेयर’ (Quantum Computing) पर होगा, यानी भारत के अपने स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटर का निर्माण करना।
2. आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi): यह ‘क्वांटम कम्युनिकेशन’ (Quantum Communication) हब होगा। यहां ऐसी संचार प्रणालियां विकसित की जाएंगी जो पूरी तरह से हैक-प्रूफ (Hack-proof) होंगी, जिससे सेना और बैंकिंग सेक्टर का डेटा पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।
3. आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay): यहां ‘क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी’ पर काम होगा, जिससे सटीक मौसम पूर्वानुमान, भूमिगत खनिजों की खोज और मेडिकल इमेजिंग के लिए अत्यंत सूक्ष्म सेंसर बनाए जाएंगे।
4. आईआईटी पुणे (IISER/IIT Pune): यह ‘क्वांटम मैटेरियल्स’ (Quantum Materials) के विकास का केंद्र होगा, जो भविष्य की बैटरी और ऊर्जा संरक्षण के लिए नए तत्वों की खोज करेगा।

स्टार्टअप्स और रिसर्च को महा-बूस्ट

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अनुसार, इन लैब्स में केवल प्रोफेसर और वैज्ञानिक ही काम नहीं करेंगे, बल्कि ये देश के युवा उद्यमियों और डीप-टेक (Deep-tech) स्टार्टअप्स के लिए पूरी तरह खुले रहेंगे। कोई भी भारतीय स्टार्टअप इन लैब्स के महंगे उपकरणों का उपयोग कर अपने सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर का परीक्षण कर सकेगा। इसके लिए सरकार उन्हें ‘सीड फंडिंग’ (Seed Funding) भी उपलब्ध कराएगी।

भविष्य की तैयारी

वर्तमान में अमेरिका, चीन और यूरोप क्वांटम तकनीक में आगे हैं। भारत सरकार का लक्ष्य है कि अगले 8 वर्षों (2033 तक) में भारत 50 से 1,000 भौतिक क्यूबिट (Qubits) क्षमता वाले स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटर का निर्माण कर ले। आईआईटी परिसरों में इन लैब्स की स्थापना से भारत न केवल आयात पर अपनी निर्भरता खत्म करेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला (Global Tech Supply Chain) का एक अहम लीडर बनकर उभरेगा।

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