वैश्विक पटल पर भारत का बढ़ता रुतबा: पीएम मोदी को रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल” से किया गया सम्मानित

विवेक ओझा/ मॉस्को/नई दिल्ली: भारतीय विदेश नीति और कूटनीति के लिए आज का दिन एक बेहद गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण लेकर आया। मॉस्को के भव्य क्रेमलिन (Kremlin) पैलेस में आयोजित एक विशेष और गरिमापूर्ण समारोह में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान *”ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल”* (Order of St Andrew the Apostle) से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी अटूट मित्रता और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में पीएम मोदी के व्यक्तिगत योगदान का एक बहुत बड़ा प्रमाण है।
क्या है यह सर्वोच्च सम्मान?
‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ रूस का सबसे पुराना और सर्वोच्च राज्य अलंकरण है, जिसे 1698 में ज़ार पीटर द ग्रेट (Peter the Great) द्वारा स्थापित किया गया था। यह सम्मान केवल उन असाधारण विदेशी राष्ट्राध्यक्षों या रूसी नागरिकों को दिया जाता है जिन्होंने रूस के साथ संबंधों को मजबूत करने या विश्व शांति में अद्वितीय योगदान दिया हो। प्रधानमंत्री मोदी इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय नेता बन गए हैं।
140 करोड़ भारतीयों को समर्पित
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बेहद भावुक और प्रभावशाली संबोधन में कहा कि, “यह सम्मान केवल मेरा व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि यह भारत के 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान है। यह उस अटूट विश्वास और मित्रता का प्रतीक है जो दशकों से भारत और रूस की जनता के बीच कायम है।” पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भी दोनों देशों के संबंध हर कसौटी पर खरे उतरे हैं।
पुतिन ने की जमकर तारीफ
समारोह के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता की जमकर सराहना की। पुतिन ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत ने न केवल अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति की है, बल्कि विश्व पटल पर एक स्वतंत्र और मजबूत आवाज बनकर उभरा है। हम उनके ‘मेक इन इंडिया’ विजन का सम्मान करते हैं और रक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था तक हर क्षेत्र में भारत के सबसे भरोसेमंद साथी बने रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
कूटनीतिक निहितार्थ (Geopolitical Significance)
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब पश्चिमी देश रूस को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं, पीएम मोदी का मॉस्को जाना और यह सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना एक बहुत बड़ा कूटनीतिक संदेश है। यह स्पष्ट करता है कि भारत एक ‘बहुध्रुवीय विश्व’ (Multipolar World) का समर्थन करता है और वह अपनी विदेश नीति किसी तीसरे देश के दबाव में तय नहीं करता। इस सम्मान ने भारत-रूस संबंधों की बुनियाद को आने वाले कई दशकों के लिए और अधिक मजबूत कर दिया है।



