Trending

रेलवे का बड़ा फैसला: ट्रेन टिकट बुकिंग और रिफंड के नियम आज से बदले, यात्रा से पहले जानें नए बदलाव

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने देश भर के करोड़ों रेल यात्रियों की सुविधा और टिकट दलाली पर अंकुश लगाने के लिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन (रद्द करने) के नियमों में आज से बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। रेल मंत्रालय द्वारा जून 2026 की शुरुआत से प्रभावी किए गए इन नए दिशा-निर्देशों के तहत अग्रिम आरक्षण अवधि और रिफंड की प्रक्रियाओं को पूरी तरह संशोधित किया गया है। यह नया नियम आईआरसीटीसी (IRCTC) काउंटर और ऑनलाइन दोनों प्रकार की टिकटों पर समान रूप से लागू होगा।

अग्रिम आरक्षण अवधि (ARP) में हुआ बड़ा सुधार
भारतीय रेलवे द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, अब यात्री अपनी यात्रा की तारीख से केवल 60 दिन पहले ही ट्रेन टिकट बुक करा सकेंगे। इससे पहले यह समय सीमा 120 दिन यानी चार महीने की हुआ करती थी।

इस महत्वपूर्ण बदलाव का मुख्य उद्देश्य वास्तविक यात्रियों को कन्फर्म सीट उपलब्ध कराना है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि लंबी अवधि होने के कारण दलाल और असामाजिक तत्व बड़ी संख्या में टिकटें ब्लॉक कर लेते थे, जिससे आम जनता को ऐन वक्त पर टिकट नहीं मिल पाती थी। अब समय सीमा आधी होने से टिकटों की कालाबाजारी पर पूरी तरह से लगाम लगेगी। हालांकि, विदेशी पर्यटकों के लिए लागू नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कैंसिलेशन और रिफंड के नए कड़े नियम
टिकट रद्द कराने पर मिलने वाले रिफंड (धनवापसी) के नियमों को भी पहले से अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया गया है। अब चार्ट बनने से पहले टिकट रद्द कराने पर क्लर्कियल चार्ज में थोड़ी वृद्धि की गई है, जबकि वेटिंग और आरएसी (RAC) टिकटों को ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से आधा घंटा पहले तक रद्द न कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा।

रेल मंत्रालय और तकनीकी विशेषज्ञों का पक्ष
इस बड़े नीतिगत सुधार पर रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर इसकी उपयोगिता को स्पष्ट किया है।

“अग्रिम आरक्षण की अवधि को 120 दिन से घटाकर 60 दिन करने का निर्णय पूरी तरह से यात्रियों के हित में है। इससे टिकटों की जमाखोरी बंद होगी और ट्रेन चलने की तारीख के पास यात्रियों को कन्फर्म बर्थ मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। हम अपनी तकनीकी प्रणाली को भी और मजबूत कर रहे हैं।”
— मुख्य प्रवक्ता, रेल मंत्रालय

डिजिटल सुरक्षा और परिवहन विशेषज्ञों ने भी इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि इस नियम से आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट पर कृत्रिम रूप से बढ़ने वाला ट्रैफिक लोड कम होगा और वास्तविक उपभोक्ताओं को बिना किसी तकनीकी बाधा के आसानी से टिकट मिल सकेंगी।

आम जनता और दैनिक यात्रियों पर सीधा असर
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद से ही नियमित यात्रा करने वाले लोगों और व्यापारिक वर्ग के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है:

तत्काल योजना बनाने वालों को लाभ: जो लोग अचानक या कम समय के भीतर यात्रा की योजना बनाते हैं, उन्हें अब ट्रेनों में नो-रूम (No-Room) या लंबी वेटिंग लिस्ट की समस्या से राहत मिलेगी।

लंबी छुट्टी की योजना में थोड़ी मुश्किल: त्योहारों या गर्मियों की छुट्टियों में महीनों पहले यात्रा की योजना बनाने वाले परिवारों को अब अधिक सतर्क रहना होगा और ठीक 60 दिन पहले अपनी सीट सुरक्षित करनी होगी।

डिजिटल रिफंड प्रक्रिया तेज: कैंसिलेशन के नए नियमों के तहत ऑनलाइन टिकट रद्द कराने पर रिफंड की राशि अब अधिकतम 24 से 48 घंटों के भीतर सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित (क्रेडिट) कर दी जाएगी, जिससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

निष्कर्ष और आगे की राह
ट्रेन टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के नियमों में किया गया यह सुधार भारतीय रेल प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है। यह व्यवस्था सीधे तौर पर आम नागरिक को दलालों के चंगुल से बचाने का काम करेगी।

आगे की कार्ययोजना के तहत, रेलवे प्रशासन अपने टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) को पूरी तरह से आधुनिक हैंडहेल्ड मशीनों से लैस कर रहा है। इससे ट्रेन छूटने के बाद खाली बची सीटों की जानकारी तुरंत ऑनलाइन सिस्टम पर अपडेट हो जाएगी, जिससे रास्ते के स्टेशनों पर प्रतीक्षारत यात्रियों को चलती ट्रेन में भी आसानी से कन्फर्म सीट आवंटित की जा सकेगी। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी भ्रम से बचने के लिए केवल रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) का ही उपयोग करें।

Related Articles

Back to top button