पाकिस्तान में असहमति की आवाजों पर डिजिटल स्ट्राइक
PECA कानून की आड़ में बड़े पैमाने पर 'साइबर क्रैकडाउन', रातों-रात दर्जनों गिरफ्तार

गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में अब लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) पर सबसे बड़ा हमला शुरू हो गया है। पाकिस्तानी सेना और वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार की आलोचना करने वालों को कुचलने के लिए, कुख्यात ‘प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट’ (PECA) कानून का सहारा लिया जा रहा है। इसी कानून के तहत बीती रात लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद में बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई, जिसमें दर्जनों यूट्यूबर, पत्रकार और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया गया है।
पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों से एक बहुत बड़ा राजनीतिक ध्रुवीकरण देखने को मिला है। मुख्यधारा के मीडिया (टीवी और अखबार) पर सेना और सरकार के कड़े नियंत्रण के बाद, आम जनता और स्वतंत्र पत्रकारों ने यूट्यूब (YouTube), एक्स (पूर्व में ट्विटर) और फेसबुक जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों को अपनी आवाज उठाने का माध्यम बना लिया था। इन मंचों पर सरकार की आर्थिक विफलताओं और सेना के राजनीतिक हस्तक्षेप की तीखी आलोचना की जा रही थी।
क्या है PECA कानून और इसका दुरुपयोग?
पाकिस्तान में साइबर अपराधों को रोकने के नाम पर वर्ष 2016 में ‘प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट’ (PECA) लाया गया था। लेकिन हाल ही में सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से इस कानून में संशोधन करके इसे बेहद सख्त और दमनकारी (Draconian) बना दिया है। नए प्रावधानों के तहत किसी भी सरकारी संस्थान (विशेषकर सेना और न्यायपालिका) की “छवि खराब करने” या “गलत सूचना” फैलाने को गैर-जमानती अपराध बना दिया गया है, जिसमें 5 साल तक की सख्त कैद का प्रावधान है।
ताजा क्रैकडाउन की सच्चाई
पाकिस्तान की ‘संघीय जांच एजेंसी’ (FIA) के साइबर क्राइम विंग ने रातों-रात लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद के कई इलाकों में छापे मारे। स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इस छापेमारी का मुख्य निशाना वे लोग हैं जो विपक्षी नेता इमरान खान (Imran Khan) की पार्टी ‘पीटीआई’ (PTI) के समर्थक हैं या जो यूट्यूब पर सरकार की आलोचना करने वाले स्वतंत्र पत्रकार (Vloggers) हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों के कंप्यूटर, हार्ड-ड्राइव और मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं, और कई के परिवारों को यह तक नहीं बताया गया है कि उन्हें कहां रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चिंता
एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) और ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने पाकिस्तान सरकार की इस ‘डिजिटल डिक्टेटरशिप’ (डिजिटल तानाशाही) की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि PECA कानून का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोधियों को खामोश करने और जनता में डर पैदा करने के लिए किया जा रहा है। यह क्रैकडाउन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान (Establishment) अब डिजिटल दुनिया में हारते हुए विमर्श (Narrative) से किस कदर बौखला गया है।



