भारत-नेपाल संबंधों में नया अध्याय
नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री 4 दिवसीय दौरे पर पहुंचे दिल्ली, ऊर्जा और सीमा सुरक्षा पर होंगे ऐतिहासिक समझौते

भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ (Neighborhood First) नीति को और अधिक मजबूती प्रदान करते हुए नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री आज अपने 4 दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच गहरी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों (‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते) को दर्शाती है। इस बहुप्रतीक्षित दौरे के दौरान ऊर्जा व्यापार, जलविद्युत परियोजनाओं और संवेदनशील सीमा प्रबंधन को लेकर कई बड़े और अहम समझौतों पर मुहर लगने की पूरी उम्मीद है।
नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर नेपाल के प्रधानमंत्री का पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में होने वाली उनकी द्विपक्षीय वार्ता (Bilateral Talks) पर पूरे दक्षिण एशिया की नजरें टिकी हैं। चीन द्वारा नेपाल में अपना कूटनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ाने की लगातार कोशिशों के बीच, नेपाली प्रधानमंत्री की यह भारत यात्रा भू-राजनीतिक (Geopolitical) दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र में महा-गठजोड़
इस दौरे का सबसे बड़ा और मुख्य एजेंडा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग है। नेपाल के पास जलविद्युत (Hydropower) उत्पादन की अपार क्षमता है और भारत उसका सबसे बड़ा बाजार है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच 400 केवी (kV) क्षमता वाली नई सीमा-पार पारेषण (Cross-border Transmission) लाइनों—जैसे इनरुवा-पूर्णिया और लम्की-बरेली—के निर्माण को लेकर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके अलावा, भारत ने अगले 10 वर्षों में नेपाल से 10,000 मेगावाट बिजली आयात करने का जो लक्ष्य रखा है, उस पर भी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। भारत की मध्यस्थता और ग्रिड की मदद से नेपाल अब बांग्लादेश को भी अपनी अधिशेष बिजली का निर्यात कर सकेगा, जिससे एक मजबूत क्षेत्रीय ऊर्जा ग्रिड का सपना साकार होगा।
सीमा प्रबंधन और सुरक्षा चुनौतियां
भारत और नेपाल के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी खुली और बिना तारबंदी वाली सीमा है। इस खुली सीमा का फायदा उठाकर होने वाली हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों के व्यापार और तीसरे देशों के संदिग्ध घुसपैठियों को रोकने के लिए एक सख्त ‘सीमा प्रबंधन समझौते’ पर मुहर लग सकती है।
* नए एकीकृत चेक पोस्ट (ICP): सीमा पर व्यापार और वैध आवाजाही को सुगम बनाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं पर नए अत्याधुनिक ‘इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट’ स्थापित करने पर सहमति बन सकती है।
* लिपुलेख और कालापानी विवाद: हालांकि लिपुलेख, कालापानी और सुस्ता क्षेत्रों को लेकर दोनों देशों के बीच पुराना नक्शा और सीमा विवाद है, लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों शीर्ष नेता इस संवेदनशील मुद्दे को मीडिया की बयानबाजी से दूर रखकर, बंद कमरों में कूटनीतिक संवाद के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर जोर देंगे।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यापारिक साझेदारी
ऊर्जा और सीमा के अलावा, भौतिक कनेक्टिविटी पर भी बड़े ऐलान होने की उम्मीद है। मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन के पहले चरण के सफल होने के बाद, अब इसे नेपाल के चितवन और झापा तक बढ़ाने के दूसरे चरण के कार्यों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, रक्सौल-काठमांडू ब्रॉड गेज रेलवे लाइन के निर्माण में तेजी लाने के लिए भी दोनों देशों के अधिकारी एक संयुक्त रोडमैप (Roadmap) पेश करेंगे।
सांस्कृतिक संबंध और रामायण सर्किट
राजनीतिक और आर्थिक वार्ताओं के साथ-साथ, दोनों देशों के बीच सदियों पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा दी जाएगी। भारत के ‘रामायण सर्किट’ को नेपाल के जनकपुर (माता सीता की जन्मस्थली) से जोड़ने वाले पर्यटन प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, नेपाली छात्रों के लिए भारत में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने और मेडिकल स्कॉलरशिप के विस्तार की भी घोषणा की जा सकती है।
नेपाल के प्रधानमंत्री की यह 4 दिवसीय यात्रा केवल एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच एक ‘लचीली और आधुनिक साझेदारी’ का नया खाका खींचने का प्रयास है। उम्मीद है कि ये समझौते न केवल नेपाल की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देंगे, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक बढ़त को भी और अधिक मजबूत करेंगे।



