जापान का ऐतिहासिक कदम
पूरे देश में '4-दिवसीय कार्य सप्ताह' को मिली कानूनी मान्यता, 'करोशी' (Karoshi) से मिलेगी मुक्ति

सदियों से अपनी अत्यधिक कठोर और जानलेवा कार्य संस्कृति (Work Culture) के लिए पहचाने जाने वाले एशियाई देश जापान ने आज एक ऐसा क्रांतिकारी फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जापान सरकार ने देश की लगातार घटती जनसंख्या और कर्मचारियों के जानलेवा मानसिक तनाव को दूर करने के उद्देश्य से पूरे देश में ‘4-दिवसीय कार्य सप्ताह’ (4-Day Work Week) को आधिकारिक और कानूनी मान्यता दे दी है। इस नए कानून के तहत अब जापानी कर्मचारियों को सप्ताह में 3 दिन के वैतनिक अवकाश (Paid Leaves) का कानूनी अधिकार मिल गया है।
दुनिया भर में जब भी कड़ी मेहनत और अनुशासन की बात होती है, तो सबसे पहला नाम जापान का आता है। लेकिन इसी कठोर अनुशासन ने जापान के समाज को भीतर से खोखला करना शुरू कर दिया था। 12 से 14 घंटे की शिफ्ट और छुट्टियों के बिना लगातार काम करने की प्रवृत्ति ने जापान में एक नए शब्द को जन्म दिया था—’करोशी’ (Karoshi), जिसका अर्थ है “अधिक काम करने के कारण होने वाली मृत्यु।” इसी अमानवीय व्यवस्था को समाप्त करने और एक नए समाज का निर्माण करने के लिए जापान की संसद (Diet) ने ‘4-दिवसीय कार्य सप्ताह’ का ऐतिहासिक बिल पारित कर दिया है।
क्या है नया ‘4-दिवसीय कार्य सप्ताह’ कानून?
इस नए श्रम कानून (Labor Law) के लागू होने के बाद, अब जापान की सभी सरकारी और निजी कंपनियों (जिनमें 50 से अधिक कर्मचारी हैं) के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे अपने कर्मचारियों को ‘4-दिवसीय कार्य सप्ताह’ का विकल्प प्रदान करें।
इसका सीधा अर्थ यह है कि कर्मचारी अब सप्ताह में केवल 4 दिन (सोमवार से गुरुवार) काम करेंगे और उन्हें शुक्रवार, शनिवार और रविवार—यानी लगातार 3 दिन—का सप्ताहांत (Weekend) अवकाश मिलेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विकल्प को चुनने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Salary) और पदोन्नति (Promotion) में कंपनियों द्वारा कोई अनुचित कटौती या भेदभाव नहीं किया जा सकेगा।
यह कदम क्यों उठाना पड़ा? (जनसांख्यिकीय संकट)
जापान सरकार द्वारा उठाए गए इस अप्रत्याशित कदम के पीछे कर्मचारियों के तनाव से भी बड़ा एक अन्य राष्ट्रीय संकट है—’लगातार घटती जनसंख्या’ (Declining Population)।
जापान वर्तमान में एक भयंकर जनसांख्यिकीय संकट से गुजर रहा है। वहां जन्म दर (Birth Rate) ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अत्यधिक काम के बोझ और समय की कमी के कारण युवा न तो डेटिंग (Dating) कर पा रहे हैं, न विवाह कर रहे हैं और न ही बच्चे पैदा करने के इच्छुक हैं। सरकार का मानना है कि 3 दिन की छुट्टी मिलने से युवाओं को अपने निजी जीवन, परिवार और सामाजिक संबंधों के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे देश की गिरती जन्म दर को वापस पटरी पर लाया जा सकेगा।
उत्पादकता (Productivity) घटने के बजाय बढ़ने की उम्मीद
शुरुआत में कई जापानी उद्योगपतियों ने इस कानून का विरोध किया था। उनका तर्क था कि इससे उत्पादन घट जाएगा और अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। लेकिन ‘माइक्रोसॉफ्ट जापान’ (Microsoft Japan) और ‘पैनासोनिक’ (Panasonic) जैसी दिग्गज कंपनियों द्वारा पहले किए गए ट्रायल (Trial) के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 4-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने के बाद कर्मचारियों की खुशहाली में तो वृद्धि हुई ही, साथ ही प्रति कर्मचारी उत्पादकता (Productivity) में भी 40 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया। कर्मचारियों ने कम समय में अधिक ध्यान केंद्रित करके (Focused Work) काम किया, और कंपनियों की बिजली तथा कार्यालय के अन्य खर्चों में भी 23 प्रतिशत तक की बचत हुई।
दुनिया भर के लिए एक बड़ा संदेश
जापान, जो अपनी ‘वर्कहोलिक’ (Workaholic) छवि के लिए दुनिया भर में कुख्यात था, उसका यह ‘यू-टर्न’ (U-turn) पश्चिमी देशों और विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देशों के लिए एक बड़ा संदेश है।
हाल ही में भारत में भी ’70 घंटे प्रति सप्ताह’ काम करने की बहस छिड़ी थी, जिसे लेकर युवाओं में भारी आक्रोश देखा गया था। जापान का यह नया कानून यह साबित करता है कि देश की तरक्की केवल मशीनों की तरह इंसानों को पीसने से नहीं होती, बल्कि कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health), उनके पारिवारिक समय और ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ (Work-Life Balance) को प्राथमिकता देने से होती है। जापान का यह कदम वैश्विक श्रम कानूनों की दिशा में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।



