शिलालेख, नींव और स्तंभ… 106 स्तंभों में मिली मंदिर की छाप, इन 9 बड़े वैज्ञानिक आधार ने भोजशाला को माना वाग्देवी मंदिर

Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश में धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर बड़ा फैसला आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इस परिसर को मंदिर स्वरूप मानते हुए विवाद पर विराम लगा दिया है। अदालत ने कहा कि पुरातात्विक (आर्कियोलॉजिकल) व्याख्या केवल अनुमान नहीं, बल्कि बहु-विषयी वैज्ञानिक प्रक्रिया पर आधारित होती है।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका निर्णय अयोध्या राम जन्मभूमि फैसला में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप है।
ASI की 2189 पेज रिपोर्ट बनी आधार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विस्तृत 2189 पेज की रिपोर्ट को अदालत ने अहम आधार माना। रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा ढांचे के नीचे 10वीं–11वीं शताब्दी के परमारकालीन मंदिर के अवशेष मिले हैं। खुदाई में बेसाल्ट पत्थर, प्राचीन ईंटें और मंदिर शैली की नींव के प्रमाण सामने आए, जो यह संकेत देते हैं कि यह स्थान मूल रूप से एक धार्मिक संरचना था।
‘शारदा सदन’ और संस्कृत शिलालेखों के प्रमाण
परिसर से मिले संस्कृत शिलालेखों में इस स्थान का उल्लेख “शारदा सदन” के रूप में किया गया है, जिसे देवी सरस्वती का प्रतीक माना जाता है। यह संकेत देता है कि यह स्थान धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र रहा होगा।
106 स्तंभों में मंदिर स्थापत्य के निशान
रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में मिले 106 स्तंभ और 82 पिलास्टर पर स्पष्ट रूप से हिंदू मंदिर स्थापत्य शैली की नक्काशी पाई गई। इनमें देवी-देवताओं की आकृतियां और पारंपरिक कलात्मक पैटर्न शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई स्तंभों को बाद में पुनः उपयोग कर वर्तमान संरचना में लगाया गया है, जिससे मूल मंदिर के अवशेषों के उपयोग की पुष्टि होती है।
मूर्तियों और प्रतीकों के महत्वपूर्ण साक्ष्य
एएसआई को परिसर में लगभग 94 मूर्तियां और कलाकृतियां मिलीं, जिनमें गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और भैरव जैसी मूर्तियां शामिल हैं। इसके अलावा दीवारों और स्तंभों पर चक्र, त्रिशूल और स्वास्तिक जैसे प्रतीक भी पाए गए, जिन्हें प्राचीन कारीगरों के चिन्ह और धार्मिक पहचान से जोड़ा गया है।
क्षतिग्रस्त मूर्तियां और पुन: उपयोग के संकेत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई मूर्तियों और शिलालेखों को जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया गया प्रतीत होता है। कई पत्थरों को उल्टा या असंगत तरीके से लगाया गया है, जिससे पुराने ढांचे के पुनः उपयोग का संकेत मिलता है।
ASI को 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत शिलालेख मिले, जबकि अरबी और फारसी शिलालेखों की संख्या अपेक्षाकृत कम बताई गई। रिपोर्ट में कहा गया कि संस्कृत शिलालेख अधिक प्राचीन और मूल संरचना से जुड़े प्रतीत होते हैं।
हाई कोर्ट ने सभी वैज्ञानिक और पुरातात्विक साक्ष्यों को मिलाकर निष्कर्ष निकाला कि यह स्थल ऐतिहासिक रूप से मंदिर संरचना से जुड़ा रहा है। अदालत ने कहा कि यह फैसला केवल वर्तमान परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन और ऐतिहासिक प्रमाणों पर आधारित है।



