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जयपुर में सात अप्रैल को पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन, शिवराज सिंह करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय मंगलवार को जयपुर में पश्चिमी राज्यों के लिए क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य देश में कृषि क्षेत्र के समग्र विकास, आत्मनिर्भरता, सतत कृषि पद्धतियों के विस्तार तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी के समावेशन को सुदृढ़ करना है। इस सम्मेलन का उद्घाटन कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे।

 

सोमवार को कृषि मंत्रालय ने जानकारी दी कि सम्मेलन मंत्रालय के मिशनों की प्रगति की समीक्षा, राज्यों के मध्य अनुभवों के आदान-प्रदान तथा भावी कार्यनीतियों के निर्धारण के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा।

 

सम्मेलन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात एवं गोवा राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। ये राज्य दलहन एवं तिलहन उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान के साथ विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे नवाचार एवं सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहेंगे।

 

सम्मेलन के अंतर्गत विभिन्न विषयगत सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख योजनाओं एवं मिशनों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन– तिलहन (एनएमईओ-ओएस) के अंतर्गत देश में तिलहन उत्पादन में वृद्धि एवं खाद्य तेलों पर आयात निर्भरता में कमी लाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मिशन के तहत वर्ष 2030-31 तक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि, क्षेत्र विस्तार तथा उत्पादकता में सुधार के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

 

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत तुअर, उड़द एवं मसूर की फसलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए बीज विकास, क्षेत्र विस्तार, सुनिश्चित खरीद, अनुसंधान एवं मूल्य श्रृंखला विकास से संबंधित विषयों पर चर्चा की जाएगी। यह मिशन देश की पोषण सुरक्षा एवं किसानों की आय वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

सम्मेलन में

 

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के अंतर्गत रसायन मुक्त एवं पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की समीक्षा की जाएगी। मिशन के तहत क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने तथा जैव-इनपुट के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जा रहा है।

 

डिजिटल कृषि मिशन (डीएएम) के अंतर्गत एग्री-स्टैक, डिजिटल किसान डेटाबेस, भूमि अभिलेखों का एकीकरण तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं रिमोट सेंसिंग तकनीकों के उपयोग के माध्यम से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों की प्रस्तुति भी दी जाएगी। इसमें राजस्थान द्वारा माइक्रो इरिगेशन मॉडल, गुजरात द्वारा बागवानी क्षेत्र में नवाचार, महाराष्ट्र द्वारा एग्री-स्टैक के उपयोग, मध्य प्रदेश द्वारा उर्वरक वितरण प्रणाली में सुधार तथा गोवा द्वारा प्राकृतिक खेती से संबंधित पहलें शामिल हैं।

 

इसके अतिरिक्त, नकली कीटनाशकों एवं उर्वरकों पर नियंत्रण, उर्वरकों की कालाबाजारी की रोकथाम, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने तथा वैकल्पिक उर्वरकों के प्रचार-प्रसार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।

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