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ईरान ने UAE पर दागीं 20 बैलिस्टिक मिसाइलें और 37 ड्रोन, हमले में एक भारतीय समेत 8 की मौत से हड़कंप

तेहरान : पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संघर्ष अब खतरनाक रूप से फैलता जा रहा है। शनिवार को ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को निशाना बनाते हुए भीषण हवाई हमला किया। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान की ओर से 20 बैलिस्टिक मिसाइलें और 37 आत्मघाती ड्रोन दागे गए। हालांकि, यूएई की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश हमलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है, लेकिन इस गोलाबारी के बीच एक भारतीय नागरिक समेत 8 लोगों की मौत की खबर ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा दिया है।

 

ट्रंप की ‘डेडलाइन’ के बीच ईरान का पलटवार

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अगले 10 दिनों तक यानी 6 अप्रैल तक कोई नया हमला नहीं होगा। लेकिन दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान को दी जा रही लगातार धमकियों ने तेहरान को उकसा दिया है। शनिवार को हुए इस हमले ने खाड़ी देशों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

 

अब तक का सबसे बड़ा मिसाइल आंकड़ा: 398 बैलिस्टिक मिसाइलें पार

रक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे चिंताजनक बात हमलों की बढ़ती संख्या है। शनिवार के हमले को मिलाकर, अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक खाड़ी क्षेत्र में दागी गई कुल मिसाइलों और ड्रोनों का आंकड़ा डराने वाला है:

 

बैलिस्टिक मिसाइलें: 398

क्रूज मिसाइलें: 15

ड्रोन हमले: 1,872

यूएई रक्षा मंत्रालय का दावा: हमले हुए नाकाम

यूएई के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उनके उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया। मंत्रालय ने इसे यूएई की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। हालांकि, हमलों के मलबे और कुछ रिहायशी इलाकों में हुए धमाकों के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है, जिसमें एक भारतीय प्रवासी की मौत की पुष्टि ने भारत सरकार की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

 

वैश्विक बाजार और सुरक्षा पर संकट

ईरान द्वारा यूएई जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्र को निशाना बनाए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति और विमानन सेवाओं (Aviation) पर गहरा असर पड़ा है। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि यदि ईरान ने अपनी आक्रामकता कम नहीं की, तो अमेरिका और इजरायल 6 अप्रैल की डेडलाइन से पहले ही ईरान पर बड़े जवाबी हमले कर सकते हैं।

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