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“भारतीय क्रिकेट का दबदबा देखना मेरा सपना था” — मिताली राज

महान बल्लेबाज मिताली राज ने बोला है कि विश्व स्तर पर भारतीय क्रिकेट के दबदबे का उनका बरसों पुराना सपना सच हो रहा है जबकि पुरूष टीम, महिला टीम और जूनियर टीमों ने हाल ही के वर्षों में बड़े आईसीसी खिताब जीते हैं।

पिछले कुछ साल में भारतीय पुरूष टीम ने 2024 और 2026 टी20 विश्व कप, महिला टीम ने पहला वनडे विश्व कप जीता। जूनियर स्तर पर अंडर 19 टीमों ने भी विश्व खिताब जीते हैं। उन्होंने बीसीसीआई नमन पुरस्कारों के दौरान कहा, ‘मैं बरसों से चाहती थी कि भारतीय क्रिकेट का दबदबा हो और अब वह समय आ गया है।’

उन्होंने कहा, ‘पिछले दो-तीन साल में भारतीय क्रिकेट महिला, पुरूष या अंडर 19 लड़के और लड़कियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। एक पूर्व क्रिकेटर होने के नाते भारतीय क्रिकेट की प्रगति होते देखकर गर्व महसूस होता है।’

मिताली राज, पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ और रोजर बिन्नी को बीसीसीआई पुरस्कार समारोह में रविवार को कर्नल सी के नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया। उन्होंने भारतीय क्रिकेट, खासकर महिला क्रिकेट के कायाकल्प का श्रेय बीसीसीआई के पूर्व सचिव और आईसीसी के मौजूदा अध्यक्ष जय शाह को दिया।

साभार : गूगल

उन्होंने कहा, ‘मैंने महिला क्रिकेट में बदलाव को देखा है और मैं बीसीसीआई और जय सर के सहयोग का जिक्र करना चाहूंगी। पिछले चार पांच साल में भारतीय महिला क्रिकेट में भारी बदलाव आया है और यह एक व्यक्ति के कारण हुआ है।’

मिताली ने कहा, ‘वैश्विक स्तर पर इसके लिये उनका विजन और प्रतिबद्धता। उन्होंने महिला क्रिकेट के विकास के लिये काफी प्रयास किये हैं।’ बीसीसीआई में शाह के कार्यकाल में महिला और पुरूष क्रिकेटरों की समान मैच फीस की शुरूआत हुई और पूरी तरह से पेशेवर महिला प्रीमियर लीग भी शुरू हुई।

मिताली ने यह भी कहा कि अपने करियर में उन्होंने सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ से काफी प्रेरणा ली। उन्होंने कहा, ‘महिला क्रिकेट का अपना सफर रहा है लेकिन हमने पुरूष क्रिकेटरों से काफी प्रेरणा ली। मैंने राहुल और सचिन से काफी कुछ सीखा। उनसे बल्लेबाजी को लेकर लंबी बातचीत की और सुझाव भी मिले जो काफी काम आये।’

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे बिन्नी ने कहा, ‘मैं खुशकिस्मत हूं कि भारत के लिये खेलने का मौका मिला। इतनी बड़ी आबादी वाले देश में हर किसी को यह मौका नहीं मिलता। भारत के लिये खेलना सबसे बड़ा लक्ष्य था जो मैंने हासिल किया।’

उन्होंने कहा, ‘खेलने के बाद मैंने ब्रेक लिया लेकिन फिर लगा कि अभी भी क्रिकेट को कुछ दे सकता हूं। फिर कोचिंग में उतरा और कर्नाटक की टीम के बाद भारत की जूनियर टीमों को कोचिंग दी और युवाओं के साथ अनुभव साझा करना बहुत अच्छा रहा।

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